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आत्मतत्व ज्ञान के अभाव से उत्पन्न होता है जीवन का दुख : संत धर्मेंद्र साहेब जी

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-तीन दिवसीय सदगुरु कबीर सत्संग समारोह का शुभारंभ

सोमन साहू –

तीन दिवसीय सदगुरु कबीर सत्संग समारोह के प्रथम दिवस पर संत धर्मेंद्र साहेब जी ने प्रवचन देते हुए कहा कि व्यक्ति के जीवन में दुख का मूल कारण आत्मतत्व ज्ञान की कमी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य बाहरी रूप से तो सभी कार्य व्यावहारिक दृष्टिकोण से करता है, लेकिन परमार्थ और आत्मतत्व को जानने का प्रयास नहीं करता।

संत धर्मेंद्र साहेब जी ने कहा कि हम कार्यक्रमों का उद्घाटन तो बड़े हर्षोल्लास के साथ कर लेते हैं, लेकिन अपने भीतर आत्मतत्व का उद्घाटन नहीं कर पाते। यही कारण है कि जीवन में दुख बना रहता है। उन्होंने बताया कि जीवन से दुख का हट जाना ही मोक्ष है और इसी की प्राप्ति को पुरुषार्थ कहा गया है।

उन्होंने पुरुषार्थ के चार प्रकार—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन्हीं चरणों को ध्यान में रखकर जीवन में कार्य करना चाहिए। जीवन का वास्तविक उद्देश्य आत्मज्ञान की प्राप्ति होना चाहिए। इसके लिए शरीर और मन का एक साथ होना अत्यंत आवश्यक है।

प्रथम दिवस के कार्यक्रम में गुरु भूषण साहेब जी, कृपा शरण साहेब जी एवं विचार साहेब जी की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम को सफल बनाने में द्वारिका साहू (अध्यक्ष), यशवंत साहू, पारख समेन्द साहेब, सुरेंद्र साहेब, गुरु शरण तथा सूरज मास्टर का विशेष सहयोग रहा।

आंचल के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तजन प्रथम दिवस के सत्संग में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन कृपा शरण साहेब जी द्वारा किया गया।

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