कोंटा संवाददाता – अभिमान एमल
सूत्रों के अनुसार सुकमा नगरपालिका के वार्ड क्रमांक 13 गायत्री माता मंदिर के पास, सोसायटी से लगे सामुदायिक भवन को नगरपालिका द्वारा एक बैंक को किराये पर दे दिया गया है।
यह भवन वर्षों से वार्डवासियों के सांस्कृतिक कार्यक्रम बैठक, सामाजिक आयोजन और सार्वजनिक उपयोग के लिए जाना जाता रहा है।
अब सवाल यह है
क्या नगरपालिका को सामुदायिक भवन किराये पर देने का अधिकार है?
क्या जनता की सुविधा के लिए बने भवन को व्यावसायिक उपयोग में बदला जा सकता है?
जनता सवाल उठा रही है
“नगरपालिका को यह ज्ञान कौन दे रहा है?
सामुदायिक भवन को किराये में देने की सलाह किसके इशारे पर दी जा रही है?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि
अब छोटे-मोटे कार्यक्रम, बैठकें और सामाजिक आयोजन कहाँ किए जाएंगे?
सूत्र यह भी बताते हैं कि
इससे पहले भी ये सामुदायिक भवन किराये पर दिया जा चुका है
और अब आशंका है कि क्या भवन का पट्टा बैंक के नाम किया जाएगा?
बड़ा जनहित सवाल
जब सामुदायिक भवन भी किराये पर चढ़ाए जा रहे हैं,
तो क्या सुकमा नगरपालिका जनता की ज़रूरतों से कटती जा रही है?









