Home चर्चा में रतनपुर माघी पूर्णिमा मेले में झूला ठेकेदारों की मनमानी, सुरक्षा और अवैध...

रतनपुर माघी पूर्णिमा मेले में झूला ठेकेदारों की मनमानी, सुरक्षा और अवैध वसूली पर उठे सवाल

20
0

रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी

रतनपुर में आयोजित स्थानीय आदिवासी माघी पूर्णिमा मेला आमतौर पर लोगों के लिए मनोरंजन और उत्साह का केंद्र होता है। मेले में लगे झूले बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए मुख्य आकर्षण माने जाते हैं, लेकिन इस बार मेले में झूला संचालकों की मनमानी, अवैध वसूली और सुरक्षा संबंधी गंभीर लापरवाही चर्चा का विषय बनी हुई है।

मेले में लगे झूलों को लेकर स्थानीय प्रेस, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। आरोप है कि झूला ठेकेदारों द्वारा न केवल जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं, बल्कि सवाल पूछने पर उनके द्वारा गलत व्यवहार भी किया जा रहा है।

झूला संचालकों की मनमानी के प्रमुख पहलू

सुरक्षा नियमों की खुलेआम अनदेखी:
कई झूले कमजोर, जंग लगे लोहे और बिना मापदंडों के लगाए गए हैं। सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।

हादसे और जान का जोखिम:
झूलों के बीच में रुक जाने, संतुलन बिगड़ने और टूटने का डर लगातार बना रहता है। ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद सुधार नहीं किया गया है।

अनुचित और मनमाना शुल्क:
झूला ऑपरेटर निर्धारित दर से कहीं अधिक शुल्क वसूल रहे हैं। जहां झूले की तय कीमत 30 रुपये होनी चाहिए, वहां 40 से 50 रुपये तक लिए जा रहे हैं।

पार्किंग और अन्य अवैध वसूली:
पार्किंग शुल्क भी मनमाने तरीके से वसूला जा रहा है। 10 रुपये की निर्धारित दर के बजाय 20 से 50 रुपये तक वसूली की जा रही है।

बिना अनुमति के संचालन:
कई झूले बिना उचित अनुमति और कार्यादेश के संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन द्वारा कभी-कभार कार्रवाई होती है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है।

सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं

तकनीकी खामियां:
झूलों में तकनीकी खराबियां आम हैं, जिससे कई बार लोग हवा में ही लटक जाते हैं और अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है।

अनट्रेंड ऑपरेटर:
झूला चलाने वाले ऑपरेटर प्रशिक्षित नहीं होते। आपात स्थिति में वे सही निर्णय लेने में असमर्थ रहते हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है।

सुझाव और समाधान

मेले की शुरुआत से पहले सभी झूलों का अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट (Safety Audit) कराया जाए। प्रत्येक झूले पर आधिकारिक रेट लिस्ट स्पष्ट रूप से लगाना अनिवार्य किया जाए। सुरक्षा और शुल्क से जुड़ी शिकायतों के लिए मेले में हेल्प डेस्क या शिकायत केंद्र बनाया जाए। बिना अनुमति संचालित झूलों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

इन सभी मुद्दों को लेकर रतनपुर में इस बार यह भी देखने को मिला है कि स्थानीय पत्रकारों की सुरक्षा और सहयोग को अनदेखा किया जा रहा है। झूला ठेकेदारों के गलत व्यवहार और मनमानी से आहत पत्रकारों की एक टीम जल्द ही कलेक्टर और एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर झूलों के मापदंडों की जांच की मांग करने की तैयारी कर रही है।

जैसे-जैसे मेले के दिन गुजरते जा रहे हैं, वैसे-वैसे ठेकेदारों की मनमानी बढ़ती जा रही है। ऐसे में आम जनता की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा तत्काल और ठोस कदम उठाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here