रायपुर | 7 फरवरी 2026
वेदांता समूह की सामाजिक पहल अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के अंतर्गत संचालित नंद घर ने देशभर के नंद घर केंद्रों में बच्चों के लिए गैर-आक्रामक (बिना सुई-चुभन), तकनीक आधारित एनीमिया जांच कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य 2 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में एनीमिया की समय रहते पहचान और रोकथाम करना है।
यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की एनीमिया मुक्त भारत, राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 और पोषण 2.0 के लक्ष्यों के अनुरूप है। पहले चरण में यह पहल ओडिशा, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में लागू की जाएगी।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हजारों बच्चों तक पहुंचेगा लाभ
ओडिशा में 531 और छत्तीसगढ़ में 262 नंद घर केंद्रों के माध्यम से यह कार्यक्रम हजारों बच्चों तक पहुंचेगा। इससे देश के दूरस्थ और वंचित समुदायों में रहने वाले बच्चों को प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच और निवारक देखभाल की सुविधा मिलेगी।
बिना खून जांचने वाली आधुनिक तकनीक का उपयोग
कार्यक्रम के अंतर्गत बिना खून निकाले, बिना सुई चुभोए बच्चों की एनीमिया जांच की जाएगी, जिससे प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और बाल-अनुकूल होगी।
इसके साथ ही एआई आधारित डेटा सिस्टम का उपयोग कर रियल-टाइम मॉनिटरिंग, जोखिम की शीघ्र पहचान और जरूरत पड़ने पर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से त्वरित जोड़ सुनिश्चित किया जाएगा।
जांच के साथ पोषण और स्वच्छता पर भी जोर
यह पहल केवल जांच तक सीमित नहीं है। इसके तहत अभिभावकों को पोषण परामर्श, व्यवहार परिवर्तन संवाद, जल-स्वच्छता-स्वास्थ्य (WASH) जागरूकता तथा फ्रंटलाइन स्वास्थ्य सेवाओं से समन्वय भी किया जाएगा, ताकि पहचान के बाद ठोस और स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।
नंद घर के सीईओ ने कही यह बात
कार्यक्रम के शुभारंभ पर नंद घर के सीईओ शशि अरोड़ा ने कहा,
“प्रारंभिक बचपन में एनीमिया अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, जबकि इसका बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव पड़ता है। यह पहल बच्चों और अभिभावकों को पारंपरिक जांच की असुविधा और भय से मुक्त करते हुए तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास है।”
वेदांता एल्युमिनियम का सामाजिक संकल्प
वेदांता एल्युमिनियम के सीईओ राजीव कुमार ने कहा,
“ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों का समाधान हमारी प्राथमिकता है। औद्योगिक विकास और सामुदायिक कल्याण साथ-साथ चलना चाहिए और यह पहल उसी प्रतिबद्धता का उदाहरण है।”
भारत में एनीमिया: एक गंभीर चुनौती
एनीमिया आज भी भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार देश में 5 वर्ष से कम आयु के 67.1% बच्चे, 59.1% किशोरियां और 15–49 वर्ष की 57% महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं। यह स्थिति बच्चों की शारीरिक वृद्धि, मानसिक विकास और सीखने की क्षमता पर गंभीर प्रभाव डालती है।
नंद घर: समग्र बाल एवं महिला विकास का मॉडल
नंद घर देशभर में आधुनिकीकृत आंगनवाड़ी केंद्रों का नेटवर्क है, जो पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी सेवाएं प्रदान करता है। एनीमिया जांच कार्यक्रम को तकनीक आधारित, सामुदायिक स्वास्थ्य मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जिसे भविष्य में अन्य राज्यों में भी विस्तार दिया जा सकेगा।









