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पूना मारगेम’ अभियान के तहत 30 इनामी माओवादी कैडरों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता

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पुकार बाफना/बीजापुर –

महामहिम राष्ट्रपति महोदया के बस्तर आगमन के अवसर पर जिले में शांति स्थापना की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के अंतर्गत साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े 30 माओवादी कैडरों ने हिंसा और जनविरोधी विचारधारा को त्यागते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

यह आत्मसमर्पण ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के अंतर्गत हुआ, जो केवल हथियार छोड़ने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत का प्रतीक बनता जा रहा है।

₹85 लाख के इनामी कैडरों ने चुना शांति का मार्ग

आत्मसमर्पण करने वाले इन 30 माओवादी कैडरों पर उनके पद और संगठनात्मक भूमिका के अनुसार कुल ₹85 लाख का इनाम घोषित था। इनमें 20 महिला एवं 10 पुरुष कैडर शामिल हैं। सभी ने भारतीय संविधान में आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने की प्रतिबद्धता जताई।

बीजापुर में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी उपलब्धियां

1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में—

  • 918 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं
  • 1163 माओवादी गिरफ्तार किए गए
  • 232 माओवादी मुठभेड़ों में मारे गए

ये आंकड़े शासन की नक्सल उन्मूलन नीति और सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति को दर्शाते हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण

दिनांक 07 फरवरी 2026 को यह आत्मसमर्पण उप पुलिस महानिरीक्षक (केरिपु ऑप्स) बीजापुर सेक्टर श्री बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक बीजापुर डॉ. जितेंद्र कुमार यादव सहित वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

हथियार व विस्फोटक सामग्री स्वेच्छा से की गई सुपुर्द

पुनर्वास प्रक्रिया के दौरान आत्मसमर्पित कैडरों द्वारा—

  • कार्डेक्स वायर – 01 बंडल
  • जिलेटिन स्टिक – 50 नग
    स्वेच्छा से सुरक्षा बलों को सौंपे गए।

प्रत्येक कैडर को तत्काल आर्थिक सहायता

शासन की नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले प्रत्येक कैडर को ₹50,000 की तात्कालिक आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। साथ ही उनके सामाजिक पुनर्वास और पुनर्समावेशन की वैधानिक प्रक्रिया जारी है।

सुरक्षा बलों का समन्वित योगदान

इस महत्वपूर्ण सफलता में DRG, जिला बल, छसबल, STF, कोबरा बटालियन तथा केरिपु की विभिन्न बटालियनों की निर्णायक भूमिका रही। निरंतर अभियान, संवेदनशील व्यवहार और विश्वास निर्माण के प्रयासों से यह संभव हो पाया।

पुलिस अधिकारियों की अपील

पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि शासन की पूना मारगेम नीति माओवादियों के भविष्य को सुरक्षित, स्वावलंबी और सम्मानजनक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. पट्टलिंगम ने कहा कि—

“हिंसा का मार्ग केवल विनाश देता है, जबकि ‘पूना मारगेम’ शांति, विकास और नए जीवन का रास्ता खोलता है। हथियार छोड़िए, मुख्यधारा में लौटिए—शासन और समाज दोनों आपके साथ हैं।”

यह आत्मसमर्पण न केवल माओवादी संगठन के कमजोर होते आधार को दर्शाता है, बल्कि बस्तर में स्थायी शांति और विकास की मजबूत नींव भी रखता है।

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