आरंग संवाददाता – सोमन साहू
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक बड़ी समस्या सामने आई है, जब उन्हें अपनी धान बिक्री का भुगतान लंबित होने की सूचना मिली। किसान नेता पारसनाथ साहू ने बताया कि 23 जनवरी से राज्य की समितियों में जो किसान धान विक्रय कर रहे थे, उनके खातों में 17 दिन बीत जाने के बाद भी राशि जमा नहीं हुई है। इससे किसान समुदाय में चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
साहू ने आगे कहा कि पहले की तुलना में इस बार भुगतान में काफी देरी हो रही है। आम तौर पर, किसानों को अपनी धान की बिक्री के 24 घंटों के भीतर भुगतान प्राप्त हो जाता था, लेकिन इस बार भुगतान में देरी ने किसानों की वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया है।
किसानों का आरोप है कि शासन की ओर से किए गए वादे के बावजूद, यह भुगतान अब तक उनके खातों में नहीं पहुंचा है। ऐसे में उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं और आगामी फसलों की तैयारी में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पारसनाथ साहू ने कहा कि यह स्थिति गंभीर है और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
समाज के किसानों ने छत्तीसगढ़ सरकार से यह मांग की है कि रुका हुआ भुगतान शीघ्र जारी किया जाए, ताकि किसान अपनी दैनिक जीवनशैली को सुसंगत रूप से जारी रख सकें। इसके अलावा, किसानों ने सरकार से यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में ऐसे भुगतान में देरी से बचने के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाई जाए, ताकि उन्हें वित्तीय संकट का सामना न करना पड़े।
किसान नेताओं और संघों द्वारा किए गए इस अनुरोध पर यदि शासन तुरंत कोई कदम नहीं उठाता है, तो किसानों के बीच नाराजगी और आंदोलन की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार को जल्द से जल्द इस मामले का समाधान करने की जरूरत है, ताकि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुरक्षित रखा जा सके और उनका विश्वास बनाए रखा जा सके।
यह मुद्दा केवल धान बिक्री के भुगतान से जुड़ा नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के किसानों की व्यापक वित्तीय स्थिति और उनके हितों से भी जुड़ा है।









