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14 फरवरी: जब किरंदुल ने ‘वेलेंटाइन’ नहीं, ‘वतन’ को चुना शहादत को समर्पित होगा शहर, 10 वीर परिवारों का होगा सार्वजनिक सम्मान

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हारून रशीद
किरंदुल।

14 फरवरी — एक ऐसी तारीख़, जिसे बाज़ार ने प्रेम के उत्सव के रूप में स्थापित कर दिया है।
लेकिन लौह नगरी किरंदुल इस दिन को एक अलग अर्थ देने जा रही है — शहादत, स्मृति और राष्ट्रऋण के सार्वजनिक स्वीकार का अर्थ।

“संविधान की कलम से पत्रकार संघ, जिला दंतेवाड़ा” के तत्वावधान में तथा AM/NS इंडिया के सहयोग से 14 फरवरी 2026, शाम 5 बजे, रीक्रिएशन क्लब किरंदुल में देश के शहीदों को समर्पित एक भव्य, भावनात्मक और ऐतिहासिक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जा रहा है।

यह केवल एक आयोजन नहीं —

यह उस राष्ट्रीय स्मृति को जीवित रखने का प्रयास है, जो अक्सर औपचारिक कार्यक्रमों और सरकारी तिथियों तक सीमित होकर रह जाती है।

10 शहीद परिवारों का सम्मान — संवेदना का केंद्र

इस आयोजन का सबसे भावनात्मक क्षण होगा — 10 शहीद परिवारों का सार्वजनिक सम्मान।उन्हें शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया जाएगा।
पर आयोजकों के शब्दों में —
“यह सम्मान प्रतीक मात्र है, असली नमन समाज की सामूहिक उपस्थिति से होगा।”क्योंकि शहादत केवल सीमा पर नहीं होती —
उसकी प्रतिध्वनि उन घरों में जीवन भर गूंजती है, जहाँ एक कुर्सी हमेशा के लिए खाली रह जाती है।


जब प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज एक मंच पर

कार्यक्रम में अनेक प्रमुख जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति प्रस्तावित है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • श्री नंदलाल मुड़ामी — जिला पंचायत अध्यक्ष, दंतेवाड़ा (मुख्य अतिथि)
  • श्री जयंत नाहटा (IAS)
  • श्री गौरव राय (IPS), पुलिस अधीक्षक
  • श्रीमती रूबी सिंह — नगर पालिका अध्यक्ष, किरंदुल
  • श्री वाय. राघवेन्दु — महाप्रबंधक, AM/NS इंडिया
  • श्री आर. के. वर्मन — अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक
  • श्री बबलू सिद्दीकी — नगरपालिका उपाध्यक्ष
  • श्री राजा कड़ती — सरपंच संघ अध्यक्ष
  • एवं अन्य गणमान्य नागरिक

इनकी उपस्थिति इस आयोजन को औपचारिकता से आगे बढ़ाकर सामाजिक संकल्प का स्वरूप प्रदान करेगी।


बच्चों की आवाज़ में गूंजेगा राष्ट्र

स्थानीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएँ
“ऐ मेरे वतन के लोगों”
और
“सारे जहाँ से अच्छा”
जैसे राष्ट्रगीतों के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे।नई पीढ़ी को शहादत का अर्थ समझाना —
इस आयोजन का एक गहरा और दूरगामी उद्देश्य है।


एक तारीख़, एक विचार, एक वैचारिक हस्तक्षेप

14 फरवरी को इस रूप में मनाने का निर्णय अपने आप में एक वैचारिक पहल है।जहाँ उपभोक्तावादी संस्कृति इस दिन को निजी उत्सव में बदल चुकी है, वहीं “संविधान की कलम से पत्रकार संघ” ने उसी दिन को राष्ट्रसमर्पण की स्मृति से जोड़कर एक सशक्त सामाजिक संदेश दिया है।यह पहल बताती है —
पत्रकारिता केवल सवाल उठाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को संवेदना और दिशा देने वाली चेतना भी है।


जनमानस से भावुक अपील

आयोजकों ने क्षेत्रवासियों से बड़ी संख्या में उपस्थित होने का आग्रह किया है, ताकि शहीद परिवार यह महसूस कर सकें कि उनका बलिदान केवल सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं — बल्कि जनमानस की धड़कनों में जीवित है।


 कार्यक्रम विवरण

🗓️ 14 फरवरी 2026
🕔 शाम 5:00 बजे
🏢 रीक्रिएशन क्लब, किरंदुल


किरंदुल इस 14 फरवरी को एक निर्णय ले रहा है —
कि तारीख़ों का अर्थ बाज़ार तय करेगा…
या समाज अपनी संवेदनाओं से उन्हें नया अर्थ देगा।

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