कुसमी बलरामपुर
संवाददाता युसूफ खान
बलरामपुर-रामानुजगंज/राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 343 (बलरामपुर–रामानुजगंज मार्ग) के निर्माण कार्य के दौरान उड़ रही सीमेंट एवं राखड़ की धूल को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
सामाजिक कार्यकर्ता मो. फैजुद्दीन के नेतृत्व में प्रभावित नागरिकों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए इसे गंभीर जनस्वास्थ्य संकट बताया है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग किए जा रहे सीमेंटेड मटेरियल और राखड़ के कारण अत्यधिक मात्रा में धूल उड़ रही है। यह धूल सड़क के दोनों ओर लगभग आधा किलोमीटर क्षेत्र में फैल चुकी है, जिससे आसपास के सैकड़ों परिवार, दुकानदार, स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग एवं राहगीर प्रतिदिन प्रभावित हो रहे हैं।

स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव का दावा
लोग लगातार सीमेंट की धूल के संपर्क में हैं। इससे छोटे बच्चों में सांस संबंधी संक्रमण, निमोनिया, आंखों में जलन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्कूली बच्चों में एलर्जी और दमा की आशंका जताई गई है। वहीं 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और हृदय रोग का खतरा बढ़ने की बात कही गई है। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं पर भी इसके दुष्प्रभाव की चिंता व्यक्त की गई है।
निर्माण एजेंसियों पर लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि निर्माण एजेंसियों द्वारा नियमित पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है और सीमेंट/राखड़ को ढंककर रखने की उचित व्यवस्था नहीं की गई है। इसे पर्यावरणीय नियमों और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बताया गया है।
13 फरवरी को चक्का जाम की चेतावनी
सामाजिक कार्यकर्ता मो. फैजुद्दीन ने कहा कि यदि 11 फरवरी 2026 तक धूल नियंत्रण एवं जनस्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) सुबह 10 बजे से राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 343 पर सीमित एवं नियंत्रित चक्का जाम किया जाएगा।
हालांकि आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया गया है। एंबुलेंस, स्कूल बस एवं अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को बाधित नहीं किया जाएगा। किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी संबंधित विभाग एवं निर्माण एजेंसियों की होगी।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस चेतावनी पर क्या कदम उठाता है।










