रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। खाकी की आड़ में नशे का काला कारोबार करने वाले एक पुलिस आरक्षक को रायपुर पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी आरक्षक न केवल नशे की तस्करी में लिप्त था, बल्कि वह शहर में सूखे नशे के कारोबार का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तस्करी के लिए वह मर्सिडीज जैसी लग्जरी गाड़ियों का इस्तेमाल करता था।
मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी, टिकरापारा में दबोचा गया
मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरक्षक का नाम हिमांशु बर्मन है। पुलिस को पिछले कुछ समय से शहर में बड़े पैमाने पर हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी की सूचना मिल रही थी। बुधवार को पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली कि आरोपी आरक्षक टिकरापारा इलाके में ड्रग्स की बड़ी डिलीवरी करने पहुंचने वाला है।
सूचना मिलते ही पुलिस की विशेष टीम ने इलाके की घेराबंदी की। जैसे ही हिमांशु अपनी कार से वहां पहुंचा, पुलिस ने उसे दबोच लिया। तलाशी के दौरान उसकी कार से एक ग्राम हेरोइन बरामद की गई है। पुलिस ने नशीले पदार्थ के साथ-साथ तस्करी में प्रयुक्त लग्जरी कार को भी जब्त कर लिया है।
मर्सिडीज और लग्जरी लाइफस्टाइल: ऐसे खुला राज
हिमांशु बर्मन की गिरफ्तारी के बाद जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। एक मामूली आरक्षक होने के बावजूद हिमांशु बेहद आलीशान जिंदगी जी रहा था। उसके पास मर्सिडीज समेत कई महंगी और लग्जरी गाड़ियां हैं। पुलिस को काफी समय से उसकी संदिग्ध गतिविधियों और अचानक बढ़ी संपत्ति पर शक था।
लेन-देन की बड़ी लापरवाही बनी गिरफ्तारी की वजह:
हिमांशु की सबसे बड़ी गलती यह रही कि वह ड्रग्स की डिलीवरी करने के बाद पैसों का लेन-देन सीधे अपने निजी बैंक खाते में करवाता था। लगातार हो रहे संदिग्ध ट्रांजेक्शन और मुखबिरों से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने उस पर नजर रखनी शुरू की। बैंक स्टेटमेंट और लोकेशन ट्रेस होने के बाद पुलिस का शक यकीन में बदल गया और अंततः उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
सिस्टम में पैठ और तस्करी का ‘मास्टरमाइंड’
जांच में यह बात सामने आई है कि हिमांशु वर्दी का फायदा उठाकर पुलिस चेकिंग और नाकाबंदी से आसानी से बच निकलता था। उसे पता था कि पुलिस कब और कहां सक्रिय रहती है, जिसका फायदा उठाकर वह शहर के भीतर ही नेटवर्क चला रहा था। वह न केवल खुद सप्लाई करता था, बल्कि रायपुर के अन्य छोटे तस्करों को भी माल उपलब्ध कराता था। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि उसके इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं।
> “कानून की रक्षा करने वालों का ही अपराध में शामिल होना बेहद गंभीर विषय है। आरोपी आरक्षक के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश जारी है।” — वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, रायपुर
रायपुर पुलिस की छवि पर दाग
राजधानी में हुई इस कार्रवाई ने पुलिस विभाग के भीतर छिपे ‘काली भेड़ों’ को बेनकाब कर दिया है। हिमांशु बर्मन जैसे लोग खाकी की धौंस दिखाकर नशे की गिरफ्त में युवाओं को धकेल रहे थे। फिलहाल, पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अब तक कितने करोड़ों का कारोबार किया है और उसके संपर्क किन बड़े ड्रग माफियाओं से हैं।
कार्रवाई का विवरण:
* आरोपी: हिमांशु बर्मन (पुलिस आरक्षक)
* बरामदगी: 1 ग्राम हेरोइन और मर्सिडीज कार
* इलाका: टिकरापारा, रायपुर
* मुख्य साक्ष्य: बैंक खातों में संदिग्ध डिजिटल ट्रांजेक्शन
इस गिरफ्तारी के बाद रायपुर पुलिस ने साफ कर दिया है कि अपराध करने वाला चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। अब देखना यह होगा कि इस ‘ड्रग्स नेटवर्क’ की जड़ें और कहां तक फैली हुई हैं।









