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उमड़ीगुड़ा का आंगनबाड़ी केंद्र हुआ बदहाल

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

बकावंड। विकासखंड बकावंड में सुशासन सरकार में प्रशासन किस प्रकार अंधेरगर्दी मचाते हैं, इसका एक उदाहरण आंगनबाड़ी केंद्रों की उपेक्षा और मासूम बच्चों की जान से खिलवाड़ के रूप में सामने आई है।
नन्हे मुन्ने बच्चों का ममत्व भरे लाड़ प्यार से पालन पोषण करने और उन्हें प्राथमिक शिक्षा देने की जगह को प्रशासनिक लापरवाही ने खंडहर में बदल दिया है। बिल्डिंग और जल के लिए खुदे बोर की हालत देख कर आप आंगनबाड़ी केंद्रों की दशा का सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं।

मामला बकावंड के उमड़ीगुड़ा के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-4 का है। बाहर से देखने पर तो भवन अच्छा खासा नजर आता है, मगर अंदर की कहानी कुछ और ही है। यहां तैनात आंगनबाड़ी सहायिका की कोई सुनता नहीं और इस विभाग के सुपरवाइजर और जिला स्तरीय अधिकारी कभी इधर आते ही नहीं हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच को विश्वास में लेकर ऐसी स्थिति आंगनबाड़ी केंद्रों की कर दी गई है। आंगनबाड़ी केंद्र भवन झाड़ झंखाड़ से घिर गया है। जहरीले जीव जंतुओं का हर पल भय बना रहता है। आंगनबाड़ी के बच्चों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केंद्र भवन की छत पर सिंटेक्स टंकी लगाई गई है, मगर यह टंकी किसी काम की नहीं है। जिस टंकी में आज तक पानी भरा ही नहीं गया हो, भला वह नौनिहालों की प्यास कैसे बुझा पाएगा? जल व्यवस्था के लिए बोर कराया गया है और एक हैंडपंप भी लगाया गया है, जो खुद प्यासे हैं। हैंडपंप झाड़ियों से घिर गया है और बोर में मलबा भर गया है। इन अव्यवस्थाओं की ओर ग्राम पंचायत का कई बार ध्यान आकर्षित कराया जा चुका है, मगर बच्चों को राहत पहुंचाने की दिशा में अब तक कोई पहल नहीं हुई है।

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