बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बस्तर की अस्मिता पर पश्चिमी संस्कृति का हमला
बस्तर पंडुम महोत्सव वाली जगह पर वेलेंटाइन डे की सजावट
जगदलपुर। जिस जगह पर बस्तर की समृद्ध और वैभवशाली संस्कृति के साक्षी देश की श्रीमती राष्ट्रपति द्रौपदी, राज्यपाल रमेन डेका, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बने थे, उस जगह पर बाबू सोना के वेलेंटाइन डे सेलिब्रेट करने का मामला सामने आया है। यह बस्तर की संस्कृति और परंपराओं पर करारा हमला है।
हालिया संपन्न हुए बस्तर पंडुम की पूरे देश में चर्चा हुई है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने संभाग स्तरीय इस आयोजन का उद्घाटन किया था। इस अवसर पर राजयपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत अन्य कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। राष्ट्रपति ने बस्तर की कला, संस्कृति और परंपराओं की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इनके संरक्षण संवर्धन पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल पर बस्तर पंडुम के आयोजन की तारीफ करते हुए बस्तर की समृद्ध धरोहरों को विश्व पटल पर स्थापित करने की बात कही थी। इसे चार दिन नहीं बीते थे कि आधुनिकता और पाश्चात्य संस्कृति की चकाचौंध में फंसे कुछ सिरफिरों ने बस्तर की संस्कृति पर हमला कर दिया।

बस्तर पंडुम आयोजन स्थल की वेलेंटाइन डे पर विशेष रूप सजावट की गई थी। लाल, गुलाबी रंग के दिल के आकार वाले बलूनों और फूलों से इसे सजाया गया था। यहां आधुनिक वेशभूषा में सजी धजी कुछ युवतियां टहलती भी नजर आईं।इससे जाहिर होता है कि बस्तर में भी बाह्य संस्कृति की घुसपैठ हो गई है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बस्तर की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण संवर्धन के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बस्तर की आदिमकालीन प्रमुख विरासत घोटुल संस्कृति को कायम रखने के उपाय किए जा रहे हैं। इसी के तहत बस्तर संभाग के नारायणपुर क्षेत्र में करोड़ों की लागत से भव्य घोटुल का निर्माण कराया गया है। यहां की लोक संस्कृति और परंपराओं से आज की युवा पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम जैसे आयोजन किए जा रहे हैं।

बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम में आत्मसमर्पित नक्सलियों ने भी बढ़ चढ़ कर भाग लेना शुरू कर दिया है। नक्सलियों को समाज, लोकतंत्र और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में ये आयोजन बड़े ही सहायक साबित हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर बस्तर की युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध और गौरवशाली संस्कृति को छोड़ वेलेंटाइन डे, हग डे, मदर्स डे, फादर्स डे, फ्रेंडशिप डे, रोज डे जैसी पश्चिमी सभ्यता के दीवाने हुए जा रहे हैं। जगदलपुर की कई युवतियां दो कदम आगे निकल गई हैं। इसकी झलक वेलेंटाइन डे पर बस्तर पंडुम आयोजन स्थल पर देखने को मिली, जहां कुछ युवतियां चहल कदमी करती हुई अपने बाबू का इंतजार कर रही थीं। शहर के होटलों में वेलेंटाइन डे पर विशेष सजावट नहीं हुई, लेकिन बस्तर पंडुम स्थल पर की गई व्यवस्था चर्चा में है,।बजरंग दल और अन्य बाबू सोना को पकड़ने वाले अन्य संगठनों के लोग बस्तर पंडुम स्थल पर नजर नहीं आए।









