क्या है सोमवती अमावस्या का महत्व?
सोमवती अमावस्या तब होती है जब अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ती है। धर्मग्रंथों के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, भगवान शिव और पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष फल मिलता है।महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान बताया गया है।
पवित्र स्नान और दान का महत्व
इस दिन श्रद्धालु गंगा नदी, यमुना नदी और नर्मदा नदी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।धार्मिक मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर स्नान और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना शुभ माना जाता है।
पीपल वृक्ष की परिक्रमा का विशेष विधान
इस दिन पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करने की परंपरा है। मान्यता है कि पीपल में सभी देवताओं का वास होता है। महिलाएं कच्चा सूत लपेटकर वृक्ष की पूजा करती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
व्रत और पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
- शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें।
- पीपल वृक्ष की पूजा कर दीपक जलाएं।
- गरीबों को भोजन और दान दें।
धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का पर्व
सोमवती अमावस्या केवल एक तिथि नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का अवसर है। इस दिन किए गए शुभ कार्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति लाने वाले माने जाते हैं।









