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मुख-मुख में मंत्रणा कुदरत के ठाट की, प्रभु तेरी अनुपम कृति धरा ये मैनपाट की- विनोद हर्ष

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सरगुजा संवाददाता – अजय गौतम
जिला प्रशासन द्वारा मैनपाट महोत्सव में हुआ शानदार सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन
अम्बिकापुर।  कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, सरगुजा के कुशल मार्गदर्शन में मैनपाट महोत्सव के अंतिम दिन सरस कवि-सम्मेलन का आयोजन हुआ। वरिष्ठ गीतकार संतोष सरल के काव्यमय संचालन में संपन्न इस कवि-सम्मेलन का लोगों ने भरपूर आनंद उठाया और आयोजन की सराहना भी की।
कवि-सम्मेलन की शुरुआत नगमानिगार पुनम दुबे ‘वीणा‘ के मैनपाट के अप्रतिम सौंदर्य पर केन्द्रित सुंदर सरगुजिहा गीत रचना से हुआ- चला संगी रे घूमे जाबो ना। सुग्घर-सुग्घर मैनपाट के देखे जाबो ना। आशुकवि विनोद हर्ष ने अपने उत्कृष्ट गीत में छत्तीसगढ़ की शिमला कहे जानेवाले मैनपाट को ईश्वर की अनुपम कृति बताया- मुख-मुख में मंत्रणा कुदरत के ठाट की, प्रभु तेरी अनुपम कृति धरा ये मैनपाट की ! इसी क्रम में डॉ. अंचल सिंहा का गीत भी खूब मकबूल हुआ- सुबह-सबेरे हल्दी बिखरे जैसे मेरी छाती में, सूरज कुछ ऐसे आता है मेरी प्यारी घाटी में। कवि प्रकाश कश्यप ने मैनपाट की अद्भुत सुषमा और मैनपाट कार्निवाल में आए लोगों का स्वागत अपनी कविता द्वारा किया- उल्टापानी, जलजल धरती, माटी जेकर चंदन है। मैनपाट के कार्निवाल में जन-जन कर अभिनंदन है।
महाशिवरात्रि पर्व होने के कारण कई कवियों ने भगवान् शिव को स्वाभाविक रूप से याद किया और उनके श्रीचरणों में अपने काव्य-सुमन समर्पित किए। मधुर कंठ के धनी वरिष्ठ गीतकार और संस्कृतिकर्मी रंजीत सारथी ने सुमधुर भक्ति गीत सुनाकर सबको  मंत्रमुग्ध कर दिया- शिव तुम्ही दया करो, तुम बिन हमारा कौन है ? तुम ही माता, तुम ही पिता, तुम ही बंधु, तुम ही सखा। तुम ही पालनहारा हो ! कवयित्री आशा पांडेय ने शिव-स्वरूप का वर्णन अपने दोहे में किया- गले गरल धारण किए, नीलकंठ भगवान्। भांग-धतूरा प्रिय लगे, मृगछाला परिधान। डॉ. सपन सिन्हा ने शंकरजी के सहज दयालु, उपकारी स्वभाव को अपने गीत में उकेरा- सदा उपकार करते हैं, हमारे भोले-शिवशंकर। दुष्ट संहार करते हैं, हमारे भोले-शिवशंकर। दोहाकार एवं शायर मुकुन्दलाल साहू ने भगवान् भोलेनाथ से जनसेवा में संलग्न रहने की कामना की- शंकर आज मुकुन्द की, कर दो पूरी आस। तन जनसेवा में लगे, मन विहरे कैलास।
कवि-सम्मेलन में वरिष्ठ गीतकार संतोष सरल ने मौजूदा बसंत ऋतु में भी जन-जीवन में पड़ रहे ठंड के व्यापक प्रभाव को सरगुजिहा में बखूबी वर्णित किया- ओह रे सरगुजा कर जाड़ा, गोरसी ला बारा, दाऊ कांपत हे हाड़ा ! कवि राजेश पांडेय ने अपने प्रिय की याद में विरह गीत सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया- हुई आंख अब नम तुम्हारी याद में। बह रहे शबनम तुम्हारी याद में। ड़ॉ. योगेन्द्र सिंह गहरवार ने काव्यमंच के बहाने नश्वर जीवन का चित्रण अपने काव्य में किया- मंच तो क़िस्सा पल-दो पल का, आज यहां कल और कहीं का। क्षणभंगुर जीवन की नौका, बारबार नहीं आता मौक़ा। कवयित्री अनिता मंदिलवार ने जीवन में कुछ सार्थक करने की अपील लोगों से की- करोगे न जब तक जतन रास्ते में, तो कैसे खिलेंगे सुमन रास्ते में। युगों तक रहेगा उजाला-उजाला, चलों खुद को कर दें हवन रास्ते में ! कवयित्री माधुरी जायसवाल ने अपनी रचना में हार में भी जीत का जज़्बा बनाए रखने की गुजारिश की- जिंदगी का सार क्या है जान लो, हार में भी जीत है यह मान लो। इनके अलावा कवि राजेन्द्र राज का सरगुजिहा गीत- कहां पाहूं दहेज दमांद तोर बर मैंहर, बेटी कइसे सुख ले रही बता मोके तैंहर- ने दहेज विरोधी जनभावना निर्मित करने की प्रेरणा दी। गीतकवि कृष्णकांत पाठक का गीत- प्यार करने का बहाना ढूंढिए, नर्म दिल का अशियाना ढूंढिए और वरिष्ठ गीतकार देवेन्द्रनाथ दुबे द्वारा प्रस्तुत अनेक हास्यपरक कविताओं ने दर्शकों को हंसाकर लोट-पोट कर दिया।
कार्यक्रम समाप्ति पर सभी कवियों को ज़िला प्रशासन द्वारा प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सीतापुर के अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व रामराज सिंह, उपायुक्त शारदा अग्रवाल, परियोजना अधिकारी गिरीश गुप्ता, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ललित शुक्ला, पूर्व विधायक प्रो. गोपाल राम, जनपद उपाध्यक्ष अनिल सिंह, भाजपा जिला उपाध्यक्ष रजनीश पांडेय, भाजपा मण्डल अध्यक्ष श्रीराम यादव सहित बडी संख्या में जिले के अधिकारी-कर्मचारी एवं काव्यप्रेमी जनता उपस्थित रही।

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