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मंच पर यशोगान, श्मशान पर भीड़: आखिर कौन दे रहा है ऐसी सोच को बढ़ावा: दीपिका शोरी

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-यह सीधी चुनौती है बस्तर की शांति को- अधिवक्ता दीपिका शोरी के कड़े तेवर=

अर्जुन झा/सुकमा। भूमकाल दिवस जैसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण अवसर पर कुख्यात नक्सली माड़वी हिड़मा के यशोगान वाले गीत बजाकर युवाओं से नृत्य करवाने और पूर्वती के श्मशान घाट में हिड़मा तथा उसकी पत्नी राजे के चिता स्थल पर 80–100 बाहरी लोगों के जमावड़े की घटना पर छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य अधिवक्ता दीपिका शोरी ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है।

अधिवक्ता दीपिका शोरी ने कहा है कि यह केवल एक कार्यक्रम की गलती नहीं है। यह बस्तर की शांति और सामाजिक चेतना को खुली चुनौती है।उन्होंने कहा है कि भूमकाल दिवस बस्तर की अस्मिता का प्रतीक है। दीपिका शोरी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि भूमकाल दिवस बस्तर की अस्मिता का प्रतीक है। यह दिन हमारे पूर्वजों के स्वाभिमान, संघर्ष और बलिदान की स्मृति का दिन है। ऐसे आयोजन के मंच पर हिंसा और खून-खराबे से जुड़े व्यक्ति का महिमामंडन करना शहीदों का अपमान है। हमारे हीरो स्वतंत्रता सेनानी हैं न कि कुख्यात नक्सली हिड़मा। एक तरफ सार्वजनिक मंच पर गीत बजते हैं, युवा नाचते हैं, और दूसरी तरफ उसी व्यक्ति के चिता स्थल पर 80 से 100 बाहरी लोग एकत्र होकर श्रद्धांजलि, पूजा-अर्चना और क्रियाकर्म करते हैं। क्या यह महज संयोग है? या बस्तर को फिर से वैचारिक रूप से भड़काने की सुनियोजित कोशिश?” उन्होंने सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि बस्तर को बारूद के अंधेरे से निकालने में वर्षों लगे हैं। अब जब विकास और विश्वास की राह बन रही है, तब हिंसा के प्रतीकों को “हीरो” की तरह प्रस्तुत करना युवाओं को भ्रमित करने की खतरनाक साजिश हो सकती है।
दीपिका शोरी ने स्पष्ट किया कि युवाओं के आदर्श भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, सुभाषचंद्र बोस और भीमराव अंबेडकर जैसे राष्ट्रनिर्माता हैं, न कि वे लोग जिनका नाम निर्दोषों के खून से जुड़ा रहा है। उन्होंने आयोजकों पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यदि यह अज्ञानता है तो गंभीर लापरवाही भी है, और यदि यह जानबूझकर किया गया है तो यह वैचारिक अपराध है। पूर्वती की घटना पर उन्होंने कहा कि संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में बाहरी लोगों का इतना बड़ा जमावड़ा सुरक्षा एजेंसियों के लिए चेतावनी है। यदि किसी प्रकार का नेटवर्क सक्रिय है, तो उसे उजागर करना जरूरी है। बस्तर को प्रयोगशाला बनाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी। दीपिका शोरी ने घोषणा की कि वह इस पूरे मामले को छत्तीसगढ़ गृह विभाग के समक्ष उठाकर उच्च स्तरीय जांच की औपचारिक मांग करेंगी।

उन्होंने दो टूक कहा-
“मैं इसका पुरजोर विरोध करती हूं। बस्तर को फिर से अशांत करने की किसी भी कोशिश का हर स्तर पर प्रतिरोध किया जाएगा। जो लोग हिंसा के प्रतीकों को पुनर्जीवित करना चाहते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश है कि बस्तर अब चुप नहीं बैठेगा।

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