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जगदलपुर में आत्मघाती सफर! ट्रैफिक पुलिस बेखबर?

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= टैक्सी में सामान की तरह लादकर ढोए जाते हैं यात्री =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। बस्तर में रोमांचक पर्यटन के अनेक स्थान हैं, यहां के जंगल भी रोमांच का अनुभव कराते हैं। वहीं यहां की सड़कों पर रोमांचकारी सफर के नजारे भी अक्सर दिखाई देते हैं, मगर इसे रोमांचक सफर कहना गलत होगा। वस्तुतः यह तो आत्मघाती सफर है, जिसमें टैक्सी वाले तो खुद अपनी जान जोखिम में डाल ही लेते हैं, आम लोगों की जान से भी खुलकर खिलवाड़ करने पर आमादा नजर आते हैं। जगदलपुर शहर और बस्तर की सड़कों पर ऐसा आत्मघाती सफर आम बात है, मगर ट्रैफिक पुलिस बेखबर बनी हुई है,
जगदलपुर की सड़क पर आज सुबह का एक दृश्य ट्रैफिक व्यवस्था और लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर गया। एक टैक्सी क्षमता से कहीं अधिक सवारी और सामान लादकर खुलेआम मुख्य सड़क पर फर्राटा भरती दौड़ती रही। कुछ टैक्सी ऑटो के पीछे लटकते हुए, तो कुछ ऊपर सामान के बीच अपनी जगह बनाए हुए दिखे। वहीं टैक्सी के अंदर ड्राइवर के अगल बगल में करीब सात लोग और पिछली सीटों पर पंद्रह लोग बिठाए गए थे। चार लोग पीछे लटक कर सफर कर रहे थे। टैक्सी आठ लोगों की क्षमता वाली टैक्सी में कुल जमा 25 लोग! मानो यह कोई स्टंट शो हो, न कि रोजमर्रा की सवारी। सुबह की हल्की धुंध, व्यस्त सड़क और तेज रफ्तार के बीच इस तरह की ‘जुगाड़ यात्रा’ ने साफ कर दिया कि शहर में ट्रैफिक रूल्स सिर्फ किताबों और बोर्ड, होर्डिंग्स तक ही सीमित हैं। हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच की मुहिम तो अक्सर दिखाई देती है, लेकिन ओवरलोडिंग जैसे कानून के खुले उल्लंघन के मामले में आंखों पर स्याह चश्मा चढ़ा लिया जाता है। “सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है” के नारों के बीच लोग अपनी जान को दांव पर लगाकर सफर करने को मजबूर हैं। सवाल यह भी है कि क्या यह मजबूरी है या लापरवाही? क्या पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन की कमी लोगों को ऐसे जोखिम उठाने पर मजबूर कर रही है, या फिर नियमों का पालन करवाने वाली व्यवस्था सुस्त हो चुकी है?विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ओवरलोडिंग किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है। एक हल्का ब्रेक लगा, सड़क पर अचानक मोड़ या सामने से आती तेज गाड़ी.. और नतीजा बेहद गंभीर हो सकता है। स्थानीय प्रशासन और ट्रैफिक विभाग से अपेक्षा है कि वे केवल चालान अभियान तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित निगरानी, जागरूकता अभियान और वैकल्पिक सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था पर भी ध्यान दें। क्योंकि सड़कें रोमांच के लिए नहीं, सुरक्षित सफर के लिए होती हैं।

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