अर्जुन झा/जगदलपुर। शिक्षकों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) पर शासन द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद बस्तर जिला शिक्षा विभाग में पिछले दो माह के भीतर 30 से अधिक शिक्षकों का संलग्नीकरण किए जाने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि कथित रूप से नियम विरुद्ध किए गए इन आदेशों की भनक जिला प्रशासन तक को नहीं लगने दी गई।
सूत्रों के अनुसार, पूर्व कलेक्टर हरिस एस के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने और नए कलेक्टर आकाश छिकारा के पदभार ग्रहण करने से ठीक पहले तक संलग्नीकरण के आदेश जारी होते रहे। पूरी प्रक्रिया गोपनीय तरीके से संचालित की गई।
शिकायत के बाद खुला मामला
युक्तियुक्तकरण से प्रभावित शिक्षकों के एक समूह तथा छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ और छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने इस संबंध में उच्चाधिकारियों से शिकायत की है। संभागायुक्त और संयुक्त संचालक शिक्षा को भी विस्तृत सूची के साथ प्रकरण भेजा गया है।
शिकायत में कहा गया है कि अधिकांश मामलों में शैक्षणिक आवश्यकता के बजाय स्वास्थ्य, पारिवारिक या मानवीय आधार का हवाला देकर संलग्नीकरण किए गए। कुछ प्रकरणों में संलग्न विद्यालय से ही वेतन आहरण के आदेश भी दिए गए हैं।
बीजापुर का उदाहरण भी आया सामने
गौरतलब है कि बीजापुर जिला में अगस्त–सितंबर 2025 में दो दर्जन से अधिक शिक्षकों का संलग्नीकरण किया गया था, जिसे शासन स्तर पर शिकायत पहुंचने के तीन दिन के भीतर निरस्त कर दिया गया था।
इसी तरह लोहंडीगुड़ा विकासखंड के एक विद्यालय में शिक्षिका के संलग्नीकरण का पंचायत द्वारा विरोध किए जाने पर 28 जनवरी को जिला शिक्षा कार्यालय घेराव की चेतावनी दी गई थी। बाद में दूसरे शिक्षक की पदस्थापना से मामला शांत हुआ।
सियासी घमासान तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। जिला पंचायत सदस्य और कांग्रेस नेता योगेश बैज ने शिक्षा विभाग के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा कि “मानवीय दृष्टिकोण सबके लिए समान होना चाहिए, भेदभाव बर्दाश्त नहीं होगा।”
चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने कहा कि उन्होंने भी वास्तविक स्वास्थ्य कारणों से कुछ नाम भेजे थे, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई।
बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल ने कहा कि वे इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे।
अधिकारियों के बयान
जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल का कहना है कि “कुछ आवेदन प्राप्त हुए थे, जिन पर मानवीय आधार पर निर्णय लिया गया।”
वहीं संयुक्त संचालक शिक्षा एचआर सोम ने बताया कि सभी जिलों से रिपोर्ट मंगाई गई है और रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रांताध्यक्ष केदार जैन ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद संलग्नीकरण किया जाना गंभीर मामला है और संबंधित अधिकारियों पर शासन को कार्रवाई करनी चाहिए।
इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और नियम पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।









