अर्जुन झा –
चित्रकोट महोत्सव-2026 के भव्य आयोजन और उद्घाटन समारोह को लेकर पूरे प्रशासनिक अमले में उत्साह और सक्रियता दिखाई दे रही है। मंच सज रहे हैं, स्वागत द्वार बन रहे हैं, वीआईपी आवागमन की रिहर्सल हो रही है। लेकिन इसी बीच जगदलपुर के धरमपुरा मार्ग से सामने आई एक तस्वीर ने महोत्सव की तैयारियों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। चित्रकोट की ओर जा रहे एक छोटे मालवाहक वाहन में क्षमता से कई गुना अधिक यात्री लटककर सफर करते दिखे—छत पर भारी सामान का ढेर और पीछे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के खड़े युवक। यह दृश्य केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
जिस समय प्रशासन महोत्सव को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की बात कर रहा है, उसी समय उसी आयोजन में शामिल होने जा रहे नागरिक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। धरमपुरा मार्ग, जो चित्रकोट जलप्रपात तक जाने का प्रमुख रास्ता है, वहां न तो पर्याप्त चेकिंग दिखाई दे रही है और न ही ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई। सवाल यह है कि जब प्रशासन को पहले से ज्ञात है कि महोत्सव के दौरान वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ेगी, तो विशेष ट्रैफिक प्लान जमीन पर क्यों नहीं उतर पाया?
महोत्सव के प्रचार-प्रसार में करोड़ों की संभावनाओं और पर्यटन वृद्धि की बात की जा रही है, लेकिन क्या किसी संभावित दुर्घटना की कीमत इन तैयारियों से अधिक नहीं होगी? सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ओवरलोडिंग न केवल वाहन संतुलन बिगाड़ती है, बल्कि ब्रेकिंग सिस्टम और चालक नियंत्रण को भी प्रभावित करती है। ऐसे में एक छोटी सी चूक सामूहिक दुर्घटना में बदल सकती है।
वीआईपी काफिलों के लिए मार्ग साफ रखने और सुरक्षा घेरा बनाने में जुटा प्रशासन यदि आम नागरिकों के लिए न्यूनतम सुरक्षा भी सुनिश्चित नहीं कर पा रहा, तो यह चिंताजनक है। महोत्सव की सफलता केवल मंच और आतिशबाजी से नहीं मापी जाएगी, बल्कि इस बात से भी तय होगी कि वहां पहुंचने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित लौटे। यदि धरमपुरा मार्ग पर यही हालात रहे, तो उत्सव की चमक के पीछे छिपी अव्यवस्था कभी भी एक बड़ी खबर बन सकती है—और तब जिम्मेदारी तय करना मुश्किल होगा।









