केंद्र सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट को लेकर नए नियम लागू कर दिए हैं। आज से प्रभावी इन दिशा-निर्देशों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को AI जनरेटेड सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा।
नए प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी प्लेटफॉर्म पर डीपफेक फोटो या वीडियो अपलोड होता है और उसकी शिकायत की जाती है, तो संबंधित कंपनी को 3 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा। सरकार का कहना है कि यह कदम फर्जी, भ्रामक और आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि—
- AI से तैयार फोटो, वीडियो या ऑडियो पर स्पष्ट रूप से “AI Generated” या समान चेतावनी लिखी हो।
- डीपफेक या मॉर्फ्ड कंटेंट की शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जाए।
- उपयोगकर्ताओं को रिपोर्टिंग का आसान विकल्प उपलब्ध कराया जाए।
सरकार के अनुसार, हाल के महीनों में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिससे व्यक्तियों की छवि और सामाजिक व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने और ऑनलाइन सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हालांकि, कुछ टेक कंपनियों ने कम समय सीमा को लेकर व्यावहारिक चुनौतियों की ओर भी संकेत किया है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। नए प्रावधानों के साथ डिजिटल स्पेस में पारदर्शिता और जिम्मेदारी बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।









