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बंगू धाकड़ और घेनवा धाकड़ की स्मृति में भूमिपूजन

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

जगदलपुर। बस्तर विकासखंड के कुदाल गांव एवं परचनपाल में भूमिपूजन तथा श्राद्धोत्सव के रूप में भूमकाल दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया। यह कार्यक्रम स्थानीय सर्वसमाज के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया।
इस अवसर पर स्वर्गीय बंगू धाकड़ एवं स्वर्गीय घेनवा धाकड़ को याद करते हुए उनकी 116वां स्मृति दिवस मनाया गया। ये दोनों लोग वर्ष 1910 के भूमकाल क्रांति के दौरान स्वदेशी जमीन की रक्षा तथा अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए थे। उनके बलिदान को याद करते हुए आज का दिन पूरे आदिवासी समाज तथा ग्रामीणों के लिए गौरव का दिन रहा। कार्यक्रम की शुरुआत भूमिपूजन एवं हवन-यज्ञ से हुई।

स्थानीय पुजारियों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना कराई। उपस्थित लोगों ने 1910 के भूमकाल घटना की याद ताजा करते हुए यह संकल्प लिया कि बलिदानियों द्वारा दिलाई गई आज़ादी एवं न्याय की भावना को हमेशा याद रखेंगे और आने वाली पीढ़ियों को इसके बारे में बताएंगे। इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि बंगू धाकड़ एवं घेनवा धाकड़ जैसे वीरों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा हेतु सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके अदम्य साहस ने आज के स्वतंत्र जीवन की नींव रखी। उन्होंने कहा कि भूमकाल दिवस केवल एक स्मृति दिवस नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, एकता और न्याय के लिए समाज को प्रेरित करने वाला दिन है। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों तथा पदाधिकारियों ने स्मृतिचिह्न पर पुष्पांजलि अर्पित की और दोनों बलिदानियों के जीवन व संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए संबोधन दिया। युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ते हुए उन्हें सामाजिक जागरूकता तथा संस्कृति के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
समापन पर स्थानीय समाजसेवी संस्थाओं ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को आपसी भाईचारे, धैर्य और त्याग की भावना से जोड़ते हैं और यह याद दिलाते हैं कि न केवल 1910 की भूमि रक्षा, बल्कि आज के विकास में भी हम सबका योगदान आवश्यक है।

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