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आध्यात्मिक निष्ठा और राजधर्म का अनूठा संगम मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के बढ़ते कदम

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आरंग संवाददाता – सोमन साहू
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक युवा नेतृत्व की चर्चा चहुंओर है, जो न केवल मंत्रालय की फाइलों में जनहित खोजता है, बल्कि पदयात्राओं के जरिए समाज की जड़ों से भी जुड़ा हुआ है। हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ सरकार के युवा कैबिनेट मंत्री और आरंग से विधायक गुरु खुशवंत साहेब की। मात्र 36 वर्ष की आयु में वे जिस परिपक्वता के साथ ‘धर्म’ और ‘शासन’ के बीच संतुलन बना रहे हैं, वह प्रदेश के युवाओं के लिए एक मिसाल बन गया है। गुरु खुशवंत साहेब वर्तमान में ‘सतनाम सद्भाव पदयात्रा’ के माध्यम से गुरु घासीदास बाबा के शांति, मानवता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करना है।
“सतनाम का मार्ग सत्य और सेवा का मार्ग है। एक गुरु के रूप में मेरा धर्म समाज को जोड़ना है, और एक मंत्री के रूप में मेरा कर्म प्रदेश की सेवा करना है।”
— गुरु खुशवंत साहेब
प्रशासनिक दक्षता में भी अव्वल
आमतौर पर यह माना जाता है कि आध्यात्मिक यात्राओं और सार्वजनिक कार्यक्रमों के बीच प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ सकती है, लेकिन गुरु खुशवंत साहेब ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है।
समय प्रबंधन: अपनी पदयात्रा के अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी वे विभाग की समीक्षा बैठकें और जनसुनवाई के लिए समय निकालना नहीं भूलते।
निष्ठा और लगन: मंत्री पद की गरिमा और जिम्मेदारी को वे पूर्ण समर्पण के साथ निभा रहे हैं, जिससे उनके विभागों में त्वरित निर्णय और विकास कार्यों में गति देखी जा रही है।
युवा जोश: छत्तीसगढ़ के सबसे कम उम्र के मंत्रियों में से एक होने के नाते, उनकी कार्यशैली में आधुनिक दृष्टिकोण और पारंपरिक मूल्यों का अद्भुत समावेश है।
सामाजिक समरसता के प्रेरक स्तंभ
उनका जीवन सेवा, समर्पण और सद्भाव का एक जीवंत उदाहरण है। वे केवल एक समुदाय विशेष के नेता नहीं, बल्कि ‘सर्वजन हिताय’ की भावना से कार्य कर रहे हैं। उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्हें गुरु का आचरण भी आता है और सत्ता की जिम्मेदारी को जनसेवा का माध्यम बनाना भी बखूबी आता है।
छत्तीसगढ़ के इस युवा मंत्री की सक्रियता यह दर्शाती है कि यदि इरादे नेक हों और संकल्प दृढ़, तो व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए आधुनिक शासन व्यवस्था में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है। गुरु खुशवंत साहेब का यह सफर केवल एक नेता का सफर नहीं, बल्कि एक ‘सेवक’ की संकल्प यात्रा है।

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