कोरबा संवाददाता – योगेंद्र राठौर
कोरबा। राज्य सरकार ने लंबे समय से चले आ रहे होली पर्व पर शराब दुकानों के खोलने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है जो कई जानकारों के अनुसार अनुचित फैसला हैं। अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने इस फैसले पर राज्य सरकार की कड़ी निंदा करते हुए इस फैसले को जोखिम भरा बताया है। अधिवक्ता श्री राठौर के अनुसार होली जैसे पर्व पूर्व से ही हुड़दंगों, बदमाशों और असामाजिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए खुला मैदान होता है ऐसे में होली पर पर शराब की बिक्री न केवल अपराध और हिंसा को बढ़ावा देगी बल्कि ऐसे में शांति पूर्वक पर्व को मनाने वाले लोगों के लिए भी अधिक चिंता का विषय बन जायेगा। ऐसे में शराबियों के कारण महिलाएं और बच्चे असुरक्षित महसूस कर सकती है।
अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने होली पर शराब दुकानें खोलने के दुष्परिणाम बताए
होली के दिन शराब दुकानें खोलने का फैसला सरकार के लिए एक बड़ा सवाल है। यह फैसला न केवल सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है, बल्कि यह सरकार की सामाजिक उत्तरदायित्व की कमी को भी दर्शाता है।
– नशाखोरी में वृद्धि: शराब दुकानें खोलने से नशाखोरी में वृद्धि होगी, जिससे समाज में अपराध और हिंसा बढ़ सकती है।
– स्वास्थ्य समस्याएं: शराब के सेवन से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, जैसे कि शराब पीने से होने वाली बीमारियां और दुर्घटनाएं।
– समाजिक अशांति: शराब दुकानें खोलने से समाज में अशांति फैल सकती है, जिससे लोगों के बीच झगड़े और मारपीट की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
– युवाओं पर बुरा प्रभाव: शराब दुकानें खोलने से युवाओं पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे वे नशाखोरी की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
क्या सरकार को यह फैसला वापस लेना चाहिए?
अधिवक्ता निमेश कुमार राठौर ने उम्मीद जताया है कि सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी और समाज के हित में निर्णय लेगी।









