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कर्म का फल तो देवताओं तक को भोगना पड़ा, हम आप कैसे बच सकते हैं: सुमित

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
देवी भागवत महापुराण में हुआ शिव और पार्वती का परिणय
भोलेनाथ से भक्तों ने मांगा आशीर्वाद
जगदलपुर। मां दंतेश्वरी मंदिर की यज्ञशाला में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के छठवें दिन सोमवार को भगवान शंकर और पार्वती का विवाह संपन्न कराया गया। इस अनुष्ठान में अर्धनारीश्वर के नाम से चर्चित किन्नर समाज के सदस्य भी बड़ी संख्या में भोलेनाथ का आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस मौके पर वाराणसी से पधारे कथावाचक आचार्य सुमित भारद्वाज ने कहा कि भजन और नाच गान से भगवान नहीं मिलते। इसके लिए मीरा और सूरदास जैसी भक्ति चाहिए सुख-दुख कुछ नहीं होता। सब पूर्व कर्म का परिणाम है। कर्म का फल तो देवताओं तक को भोगना पड़ा है, फिर हम- आप कैसे बच सकते हैं। मां जगदम्बा की आराधना करते हुए हमें अनुचित कर्मों से बचना चाहिए उन्होंने कहा कि अष्टभुजा देवी ही तीनों देवों की जननी है और हमें इस रूप की ही पूजा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अहिंसा परमो धर्म है। इसका मतलब यह नहीं है कि अपनी सुरक्षा ही ना करें, पर यह भी जरूरी नहीं है कि किसी के लिए भी हम हिंसक हो जाएं। निर्बल पर बल प्रयोग कर आप क्या हासिल कर सकते हैं?
जननी की पूजा पहले
   मां दंतेश्वरी की यज्ञशाला में चल रहे श्रीमद् भागवत महापुराण के तहत सोमवार को स्कंदमाता महात्म, मां  दुर्गा  और महिषासुर, देवी के तीन चरित्र, मां शाकंभरी की कथा के सुनाई गई। कथा वाचक ने कहा कि भले आप देवी देवताओं की पूजा न करें लेकिन जन्म देने वाली माता की पूजा जरूर करें।
हुई शिव – शक्ति की शादी
 कथा प्रसंग के दौरान भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह कराया गया। इस मौके पर दो बालिकाओं को शिव और शक्ति के रूप में अलंकृत किया गया था।
आज के अनुष्ठान
श्रीमद देवी भागवत महापुराण कथा के तहत मंगलवार को मां कात्यायनी महात्म, श्री राधारानी की कथा, मां गंगा की उत्पत्ति और महात्म के बाद दंतेश्वरी चालीसा उसके बाद मां कात्यायनी की पालकी निकाली जाएगी।

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