हरियाणा के आईडीएफसी बैंक घोटाले (IDFC First Bank) में एसीबी (ACB) ने बड़ी कार्रवाई की है। मास्टरमाइंड रिभव ऋषि समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने देर रात छापेमारी के बाद पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करने में कामयाब हुई। मास्टरमाइंड रिभव पहले IDFC First Bank का मैनेजर रह चुका है।
पुलिस जांच में पता चला है कि मास्टरमाइंड रिभव ऋषि इससे पहले IDFC First Bank का मैनेजर रह चुका है। फिलहाल चंडीगढ़ के नजदीक पंजाब के जीरकपुर के AU Small Bank में मैनेजर के पद पर तैनात था।
रिभव ऋषि ने ही फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी पैसे के गबन की साजिश रची थी। रिभव ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर हरियाणा के सरकारी डिपार्टमेंट के खातों में 590 करोड़ रुपए निकाले थे। गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय, स्वाति और एक अन्य शामिल हैं।
सरकार को पिछले साल जुलाई में ही इस गड़बड़ी की भनक लग गई थी। इसे लेकर वित्त विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) ने सभी विभागों को लेटर लिखकर अलर्ट भी किया था। चौंकाने वाली बात है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद 18 सरकारी विभागों के खाते चंडीगढ़ के बैंकों में खोले गए। अब सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस को इंपैनल्ड करने की हाई लेवल जांच बैठा दी है।
वहीं, इस फ्रॉड पर चल रहे हंगामे के बीच मंगलवार को CM नायब सैनी ने विधानसभा में जानकारी दी कि IDFC फर्स्ट बैंक से ब्याज समेत पूरी रकम की रिकवरी कर ली गई है। ACB के सूत्रों के मुताबिक कुछ अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। सवाल ये है कि पंचकूला में मुख्यालय होने के बावजूद कुछ IAS अफसरों ने चंडीगढ़ के बैंकों में खाते खुलवाने की दिलचस्पी क्यों दिखा रहे थे? क्या इन अफसरों को सीधे तौर पर कोई लाभ मिला?









