बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बस्तर के चार जिलों के प्रधान पाठक वंचित
संयुक्त संचालक ने मांगा डीईओ से स्पष्टीकरण
जगदलपुर। सरकार होली से पहले शिक्षकों को बड़ा तोहफा देने वाले थे। शिक्षक भी पदोन्नति की उम्मीद लगाए बैठे थे, मगर चार जिलों के अधिकारियों की लापरवाही ने सारे किए धरे और शिक्षकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
दरअसल यह मामला प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठकों की पदोन्नति से जुड़ा हुआ है। इन शिक्षकों को पूर्व माध्यमिक शालाओं के प्रधान पाठक पद पर पदोन्नत किया जाना है। यह मसला सालों से लटका हुआ है और पचासों प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठक पदोन्नति की राह देखते देखते रिटायर हो चुके हैं और सैकड़ों प्रधान पाठक सेवानिवृत्ति की दहलीज पर पहुंच चुके हैं। विभिन्न शिक्षक संगठन इस मुद्दे को समय समय पर शासन और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उठाते भी रहे हैं। मांग को देखते हुए शासन ने शिक्षकों की पदोन्नति हेतु दिशा निर्देश जारी भी कर दिए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारियों के कार्यालयों से प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठकों की वरिष्ठता सूची संयुक्त संचालक कार्यालय में भेजनी थी। संयुक्त संचालक के अनुमोदन के बाद यह पदोन्नति सूची जारी की जानी थी। संयुक्त संचालक लोक शिक्षण बस्तर संभाग श्री सोम से मिली जानकारी के मुताबिक संभाग के बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों ने अब तक प्राथमिक शालाओं के प्रधान पाठकों की वरिष्ठता और पदोन्नति सूची संयुक्त संचालक कार्यालय को नहीं भेजी है। इस वजह से पदोन्नति अधर में लटक गई है। इस संबंध में संयुक्त संचालक ने चारों जिला शिक्षा अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। इससे जाहिर होता है कि उच्च अधिकारी ही नहीं चाहते कि समय पर शिक्षकों की पदोन्नति हो। संयुक्त संचालक के पत्र के बाद अब देखना होगा कि चारों जिला शिक्षा अधिकारी कितनी ततपरता दिखाते हैं?









