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संभागीय अध्यक्ष श्री उमेंद्र सिंह गोटी एवं संभागीय सचिव रामचंद्र सोनवंशी माध्यमिक शाला प्रधान अध्यापक पदोन्नति शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सभी जिला अध्यक्ष से सहमति लेकर संगठन की ओर से संयुक्त बयान जारी कर कहा आखिर कब तक

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कोंडागांव संवाददाता – विनीत पिल्लई
जगदलपुर : बस्तर संभाग के शिक्षकों की पदोन्नति का इंतजार खत्म, प्रधान पाठक बनने की समय-सारिणी जारी
6 मार्च तक पूरी होगी प्रक्रिया
बस्तर संभाग के शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से पदोन्नति की राह देख रहे टी (ट्राइबल) एवं ई (एजुकेशन) संवर्ग के शिक्षकों और प्राथमिक शाला के प्रधान पाठकों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। बस्तर संभाग के अंतर्गत कार्यरत स्नातक व प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला के पद पर पदोन्नत करने की आधिकारिक परिपत्र में इस हेतु विस्तृत समय-सारिणी भी जारी कर दी गई है।
     संयुक्त संचालक स्कूल शिक्षा विभाग श्री एचआर सोम ने इस संबंध में बताया कि पदोन्नति की यह पूरी प्रक्रिया  पदोन्नति आदेश जारी होने के बाद 2 मार्च से 5 मार्च 2026 के बीच काउंसलिंग की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी।
इस समय सारणी के अनुसार पदोन्नति नहीं होना हम शिक्षकों के लिए मुश्किल बढ़ा दी
उमेन्द्र सिंह गोटी और रामचंद्र सोनवंशी पुनः संयुक्त संचालक बस्तर संभाग अनुरोध करते हुए
शिक्षकों की पदोन्नति (Promotion) न होने से उनका मनोबल गिरता है, कार्य के प्रति प्रेरणा कम होती है और आर्थिक नुकसान होता है, जिससे वे हताशा महसूस कर सकते हैं। लंबे समय तक एक ही पद पर रहने से करियर में रुकावट, असंतोष, कार्य में अरुचि और सेवानिवृत्ति तक उच्च पद न मिल पाने का मानसिक तनाव बना रहता है।
शिक्षकों की पदोन्नति न होने के मुख्य प्रभाव:
मनोबल में कमी और असंतोष: पदोन्नति न मिलने से शिक्षकों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है और वे हतोत्साहित महसूस करते हैं।
आर्थिक नुकसान: पदोन्नति के साथ वेतन वृद्धि भी रुक जाती है, जिससे उन्हें वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।
करियर में ठहराव: लंबे समय तक एक ही पद पर काम करने से पेशेवर विकास रुक जाता है।
कार्य प्रेरणा में कमी: शिक्षकों में काम के प्रति उत्साह और समर्पण कम हो जाता है, जिससे उनकी उत्पादकता पर असर पड़ता है।
सेवानिवृत्ति तक असंतोष: कई मामलों में शिक्षक पूरी सेवा के दौरान बिना पदोन्नति के सेवानिवृत्त हो जाते हैं, जिससे उन्हें जीवन भर एक ही पद पर काम करना पड़ता है।
काम करने की क्षमता पर असर: निराशा के कारण शिक्षक बच्चों को पढ़ाने में उतनी रुचि नहीं दिखाते, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।
इस स्थिति से बचने के लिए शिक्षकों को अपने समयबद्ध पदोन्नति के नियमों के बारे में जागरूक होना चाहिए।

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