Home चर्चा में महासमुंद जिले की चिरलंबित समस्या – ‘हाथी-मानव द्वंद्व’ और उसका स्थाई समाधान

महासमुंद जिले की चिरलंबित समस्या – ‘हाथी-मानव द्वंद्व’ और उसका स्थाई समाधान

7
0
1. समस्या क्या है?
महासमुंद जिले के सिरपुर, सरायपाली और बसना क्षेत्र में ‘हाथी-मानव द्वंद्व’ (Human-Elephant Conflict) एक गंभीर समस्या बनी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में हाथियों के दल द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचाने, घरों को ढहाने और जनहानि की घटनाओं में भारी वृद्धि हुई है। वर्तमान में स्थिति यह है कि किसान अपनी खड़ी फसल को लेकर डरे रहते हैं और ग्रामीण शाम के बाद घरों से निकलने में कतराते हैं।
2. मुख्य कारण क्या हैं?
* प्राकृतिक आवास का संकुचन: जंगलों के बीच से गुजरने वाले चौड़े रास्तों और अतिक्रमण के कारण हाथियों के प्राकृतिक गलियारे (Corridors) बाधित हुए हैं।
* भोजन और पानी की तलाश: जंगलों में हाथियों के लिए पर्याप्त फलदार वृक्षों और बारहमासी जलाशयों की कमी होने के कारण वे रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं।
* निगरानी तंत्र में कमी: वन विभाग के पास आधुनिक ट्रैकिंग और त्वरित सूचना प्रणाली का अभाव होना, जिससे हाथी अचानक गांवों में घुस जाते हैं।
3. व्यवहारिक समाधान (Action Plan)
समस्या सिर्फ शिकायत की नहीं, रणनीति की है। इसके समाधान के लिए निम्नलिखित त्रि-स्तरीय मॉडल अपनाया जा सकता है:
* हाथी मित्र बेरियर (Bio-Fencing): खेतों की मेड़ों पर ‘मधुमक्खी पालन’ (Bee-fencing) और मिर्च के धुएं का प्रयोग किया जाए। हाथी मधुमक्खियों की आवाज से प्राकृतिक रूप से दूर भागते हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त आय भी होगी और फसल भी सुरक्षित रहेगी।
* डिजिटल अलर्ट सिस्टम: ‘गजराज’ ऐप जैसी तकनीक को जिले में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए। हाथियों के गले में ‘रेडियो कॉलर’ डालकर उनकी लोकेशन सीधे ग्रामीणों के मोबाइल पर SMS और गांव के ‘पब्लिक एड्रेस सिस्टम’ (लाउडस्पीकर) से जुड़ी हो।
* एलिफेंट जोन में बफर और कॉरिडोर: हाथियों के लिए सुरक्षित ‘फूड जोन’ जंगल के भीतर ही विकसित किए जाएं, जहाँ बरगद, गूलर और बाँस का भारी मात्रा में वृक्षारोपण हो, ताकि वे भोजन की तलाश में बाहर न आएं।
निष्कर्ष:
महासमुंद में हमें हाथियों को ‘शत्रु’ नहीं, बल्कि ‘सह-अस्तित्व’ (Co-existence) की दृष्टि से देखना होगा। सरकार, वन विभाग और जागरूक नागरिकों के साझा प्रयास से हम जनहानि शून्य कर सकते हैं और किसानों की मेहनत को बचा सकते हैं।
:- अब्दुल रफीक खान
कोमाखान

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here