Home चर्चा में 50 मिलियन टन लोहा… और एक अनसुना सवाल

50 मिलियन टन लोहा… और एक अनसुना सवाल

29
0

हारून रशीद –

आज खबर आई —

NMDC किरंदुल परियोजना ने 50 मिलियन टन लौह अयस्क उत्पादन का मुकाम छू लिया।

यह कोई साधारण आंकड़ा नहीं है।
यह उन पहाड़ों की कहानी है
जिन्होंने अपनी छाती खोलकर
देश को लोहा दिया।

यह मशीनों की गड़गड़ाहट है,
रेल की पटरियों की थरथराहट है,
और भारत की इस्पाती ताकत का प्रतीक है।

इस उपलब्धि पर
तालियाँ बनती हैं।

लेकिन…

तीसरी आंख जब इस आंकड़े को देखती है
तो एक और तस्वीर दिखाई देती है।

उसी जमीन के युवा —
जिनकी धरती से यह लोहा निकलता है —
आज भी NMDC की लंबित भर्ती परीक्षा की तारीख़ का इंतज़ार कर रहे हैं।

धरना हुआ।
सहमति बनी।
और वादा किया गया था कि
भर्ती प्रक्रिया इसी वित्तीय वर्ष में पूरी होगी।

पर समय बीतता गया —
और इंतज़ार अब भी जारी है।

यह विरोध नहीं,
बस एक अजीब सा विरोधाभास है —

> खनन की रफ्तार 50 मिलियन टन तक पहुँच गई,
> पर भर्ती की प्रक्रिया अब भी एक तारीख़ तक नहीं पहुँच पाई।

बस्तर की धरती ने
देश को लोहा दिया है।

अब वक्त है कि
यही धरती अपने युवाओं को
मौका भी दे।

क्योंकि इतिहास सिर्फ उत्पादन से नहीं बनता,
विश्वास से बनता है।

और विश्वास तभी मजबूत होता है
जब विकास के साथ
स्थानीय युवाओं का भविष्य भी आगे बढ़े।

 तीसरी आंख का सीधा सवाल

क्या वक्त नहीं आ गया कि NMDC अपनी ‘50 MT’ उपलब्धि की तरह
‘1000 लोकल जॉब्स’ का लक्ष्य भी घोषित करे?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here