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डर के साये से उजाले का सफ़र: मिसमा में विकास की नई सुबह, जोशना की मुस्कान बनी उम्मीद की पहचान

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पोडियामी दीपक/ सुकमा –

कभी नक्सल प्रभाव और भय के साये में जीने वाला कोंटा विकासखंड का ग्राम मिसमा आज विकास और आत्मविश्वास की नई पहचान बनता जा रहा है। यह बदलाव केवल सड़कों और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोगों के जीवन और सोच में भी गहराई से दिखाई दे रहा है। इस परिवर्तन की एक सशक्त तस्वीर हैं श्रीमती जोशना विश्वास, जिनके जीवन में शासन की योजनाओं ने नई रोशनी भर दी है।

जहां कभी असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल था, वहीं आज मिसमा में महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही हैं। श्रीमती जोशना विश्वास को महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। यह छोटी सी मदद उनके लिए बड़ी ताकत बन गई है, जिससे वे अपने परिवार की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं।

जोशना बताती हैं कि पहले भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब शासन की योजनाओं ने उनके जीवन में स्थिरता और आत्मविश्वास दोनों लाए हैं। वे कहती हैं कि यह सहायता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी मजबूत करने वाली है। महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने वाली इस योजना के लिए उन्होंने विष्णु देव साय का आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि सरकार की दूरदर्शी नीतियों ने गांव की महिलाओं को नई दिशा दी है।

आज मिसमा की तस्वीर बदल रही है। यहां महिलाएं आगे आ रही हैं, परिवार मजबूत हो रहे हैं और विकास की किरणें अंतिम छोर तक पहुंच रही हैं। यह कहानी केवल एक गांव की नहीं, बल्कि उस बदलते भारत की है जहां शासन की योजनाएं सच में लोगों के जीवन को छू रही हैं और उन्हें नई उम्मीद दे रही हैं।

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