जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जयसवाल
बिर्रा -इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट (मध्य प्रदेश)तथा स्वर्गीय श्री अमीचंद अग्रवाल की स्मृति के संयुक्त तत्वाधान में पुण्य सलिला वैन गंगा के तट पर बसा बालाघाट चर्चित नगर जहां राष्ट्रीय साहित्य एवं पुरातत्व का 24 वां अनोखा महाभव्य अनुष्ठान सहयोगात्मक रूप से सादगी पूर्वक आयोजित हुआ।उक्त अवसर पर कई राज्यों से प्रतिष्ठित साहित्य विद,इतिहास विद,समाज शास्त्री,पत्रकार उपस्थित हुए।शिक्षक डॉ उमेश कुमार दुबे जिन्होंने अपने जीवन में दीर्घकाल तक विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक,पर्यावरण हिंदी भाषा,साहित्य,इतिहास धर्म,संस्कृति,पत्रकारिता समाज सेवा एवं पारस्परिक सौहार्द बढ़ाने व अन्य रचनात्मक कार्यों को संपादित करने में अभूतपूर्व वृद्धि करके विशालतम रूप से शासन प्रशासन,जन समूह में ध्यानाकर्षण का केंद्र बनाया है।डॉ उमेश कुमार दुबे अपनी इच्छा तपोबल से संपूर्ण योजनाओं को समय पूर्व ही क्रियान्वयन करने में सफलता अर्जित कर गौरवान्वित किया है। जिसके कारण राष्ट्रीय साहित्य पुरातत्व के 24 वां महाभव्य अनुष्ठान में इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र सिंह गहरवार (इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान भारत कैंप बालाघाट) व अध्यक्ष श्रीमती कविता गहरवार (इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान प्रधान संपादक गंगोत्री) द्वारा डाकघर के माध्यम (पार्सल) से शिक्षक डॉ उमेश कुमार दुबे को राष्ट्रीय शिखर रत्न विदश्री से सम्मानित किया गया।
1998 में शासकीय आर के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेमरिया (व्यवस्था के अंतर्गत सहायक शिक्षक विज्ञान) से कैरियर शुरू कर शिक्षाकर्मी वर्ग 3,प्रभारी प्राचार्य शासकीय आर के उत्तर माध्यमिक विद्यालय सेमरिया,सहायक शिक्षक पंचायत, शिक्षक एलबी,पीएलसी प्रभारी, राष्ट्रीय आईडियाज जिला प्रभारी,स्वीकृति मंच,गढबो नवा छत्तीसगढ़,ब्लॉक मीडिया प्रभारी,जिला मीडिया प्रभारी समग्र शिक्षा जांजगीर चांपा से लेकर वर्तमान में प्रभारी प्रधान पाठक तक की यात्रा में उमेश कुमार दुबे ने हर पद पर अपनी गरिमा बनाई। आज वह एक आदर्श शिक्षक के रूप में पहचाने जाते हैं। उमेश कुमार दुबे का राष्ट्रीय शिखर रत्न विदश्री यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है बल्कि ग्रामीण शिक्षा के क्षेत्र में एक नई सोच और सकारात्मक बदलाव की पहचान है उन्हें मिलने वाला या सम्मान उन सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है जो शिक्षा को केवल नौकरी नहीं बल्कि सेवा मानते हैं शिक्षक उमेश कुमार दुबे को पहले भी कई अवसरों पर सामाजिक स्तर स्थानीय स्तर,संकुल, विकासखंड स्तर पर श्रेष्ठ शिक्षक एवं उत्कृष्ट पीएलसी सम्मान,जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री व कलेक्टर द्वारा मुख्यमंत्री शिक्षा दूत सम्मान और अनेक अन्य पुरस्कार कोविड-19 जागरूकता अभियान चलाने के लिए श्री दादा साहेब फाल्के फिल्म इंटरनेशनल अवार्ड फिल्म फाउंडेशन बड़ोदरा के द्वारा कोरोनावायरस का प्रशस्ति पत्र से सम्मान,INTERNATIONL GRADUATE SCHOOL OF THEOLOGY KULAM KEDAH MALESIYA द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिएDOCTOR OF PHILOSOPHY,इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट मध्य प्रदेश द्वारा शिक्षा/साहित्य वाचस्पति की मानद उपाधि (डॉक्टरेट अवार्ड) राष्ट्रीय राष्ट्रभाषा स्वाभिमान विद श्री,राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन कॉन्फ्रेंस कॉलेज आफ हायर एजुकेशन राजनादगांव छत्तीसगढ़ द्वारा साहित्य श्री,सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता सम्मान,अंबेडकर नेशनल हीरो अवार्ड और अरविंदो सोसायटी द्वारा शिक्षक सम्मान समारोह एवं इनोवेटिव पाठशाला कार्यक्रम प्रशिक्षण के उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान,अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के द्वारा प्रशस्ति पत्र से और अनेक सम्मान से सम्मानित किए जा चुके हैं।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी रत्ना थवाईत ने कहा कि उमेश कुमार दुबे ने अपने शिक्षक के जीवन में हमेशा यह सिद्ध किया है कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं बल्कि यह बच्चों के संस्कार जीवन शैली और सोच को भी आकर देती है उन्होंने शिक्षाकर्मी वर्ग 3 के रूप में शासकीय आर के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेमरिया से कार्य शुरू किया और वर्तमान में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया में प्रभारी प्रधान पाठक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं उनका लक्ष्य हमेशा रहा है कि हर बच्चा पढ़ाई में आनंद महसूस करें और स्कूल से जुड़ा रहे और शिक्षा के साथ संस्कार भी सीखें साथ ही साथ विभागीय योजनाओं को प्रचार प्रसार करने में अह…







