केशकाल संवाददाता – विनीत पिल्लई
शासकीय हाई स्कूल हात्मा में बच्चों ने खेल-खेल में सीखी परंपराओं के पीछे छिपे विज्ञान की बारीकियां

हात्मा:
भारतीय नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के पावन अवसर पर शासकीय हाई स्कूल हात्मा में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यालय में नववर्ष को केवल एक पारंपरिक त्योहार के रूप में नहीं, बल्कि ‘प्रकृति, विज्ञान और नवाचार के उत्सव’ के रूप में मनाया गया। इस दौरान स्कूली बच्चों को चारदीवारी से बाहर निकालकर सीधे प्रकृति से जोड़ा गया और उन्हें हमारे त्योहारों के पीछे छिपे गहरे वैज्ञानिक कारणों से अवगत कराया गया।

प्रकृति अन्वेषण: खेतों और बगीचों में विज्ञान की क्लास
कार्यक्रम की शुरुआत एक बेहद रोचक ‘प्रकृति अन्वेषण यात्रा’ से हुई। बच्चों को गाँव के खेतों, खलिहानों और बगीचों का भ्रमण कराया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को आम, महुआ, इमली, नीम और फरसा (पलाश) जैसे स्थानीय पेड़ों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला। शिक्षकों द्वारा बच्चों को इन पेड़ों के औषधीय गुणों, पर्यावरण संरक्षण में उनकी भूमिका और ऋतु परिवर्तन के साथ उनमें होने वाले बदलावों के बारे में विस्तार से समझाया गया। बच्चों ने जाना कि कैसे ये पेड़ हमारे स्वास्थ्य और इकोसिस्टम के लिए संजीवनी का कार्य करते हैं।

नवाचारी गतिविधियां: तोरण से लेकर प्राकृतिक रंगों तक
प्रकृति भ्रमण के पश्चात स्कूल परिसर में कई व्यावहारिक और वैज्ञानिक गतिविधियां आयोजित की गईं:
औषधीय तोरण निर्माण: बच्चों ने अपने हाथों से आम और नीम के पत्तों का तोरण (बंदनवार) बनाया। इस दौरान उन्हें समझाया गया कि यह केवल एक सजावट नहीं है, बल्कि ऋतु परिवर्तन के समय हवा को शुद्ध करने और बैक्टीरिया को रोकने वाला एक प्राकृतिक ‘एयर फिल्टर’ है।
प्राकृतिक रंगों की खोज और कैंपस वॉक: कैंपस वॉक के दौरान बच्चों ने फरसा (टेसू) के फूलों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों से रंग बनाने की प्रक्रिया को समझा, जो रसायन विज्ञान का एक बेहतरीन और सुरक्षित उदाहरण है।
छाया मापन (Shadow Tracking): खगोल विज्ञान और सूर्य की स्थिति को समझाने के लिए बच्चों से छाया मापन की गतिविधि कराई गई। इससे विद्यार्थियों ने दिन के अलग-अलग समय में सूर्य की गति और पृथ्वी के घूमने के सिद्धांत को व्यावहारिक रूप से समझा।

सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता: सीखी गई बातों का परीक्षण
दिन भर की इन रोमांचक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के बाद, कार्यक्रम के अंतिम चरण में बच्चों के बीच एक ‘सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया। इस क्विज़ में प्रकृति भ्रमण, पेड़ों के औषधीय गुणों, तोरण के विज्ञान और नववर्ष के खगोलीय आधार से जुड़े प्रश्न पूछे गए। विद्यार्थियों ने अत्यधिक उत्साह के साथ इस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी नई सीखी गई वैज्ञानिक जानकारी का शानदार प्रदर्शन किया। व्याख्याता संदीप सेन ने कहा-
यह संपूर्ण आयोजन बच्चों के भीतर वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) विकसित करने, उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने की दिशा में एक बेहद सफल और नवाचारी कदम साबित होगा। खेल-खेल में विज्ञान सीखने के इस तरीके से विद्यालय के सभी बच्चे बेहद उत्साहित नजर आए।







