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‘धुरंधर 2’: रणवीर सिंह का दमदार अंदाज़, लेकिन लंबी कहानी और कम सरप्राइज ने घटाया असर

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धुरंधर 2 को लेकर रिलीज से पहले जबरदस्त माहौल बना हुआ था। पहले पार्ट की सफलता के बाद दर्शकों की उम्मीदें काफी ऊंची थीं। एडवांस बुकिंग भी शानदार रही, लेकिन कुछ शहरों में प्रीव्यू शो कैंसल होने से शुरुआत में दर्शकों को निराशा झेलनी पड़ी।

अब सवाल यह है कि क्या फिल्म उन उम्मीदों पर खरी उतरती है? जवाब है—फिल्म ठीक-ठाक है, लेकिन पूरी तरह यादगार नहीं बन पाती।

कैसी है फिल्म?

करीब चार घंटे लंबी यह फिल्म शुरुआत और क्लाइमैक्स में जरूर प्रभावित करती है, लेकिन बीच का हिस्सा कई जगह धीमा और खिंचा हुआ महसूस होता है।
फिल्म आपको पूरी तरह निराश नहीं करती, मगर पहले पार्ट जैसा कसाव और लगातार रोमांच इसमें नहीं दिखता।

जहां कुछ सीन दमदार हैं, वहीं कई हिस्से ऐसे हैं जहां कहानी पकड़ खो देती है और दर्शक बोरियत महसूस कर सकते हैं।

कहानी की झलक

फिल्म की कहानी कई हिस्सों में आगे बढ़ती है और फ्लैशबैक से शुरू होती है।
जसकीरत सिंह रांगी (रणवीर सिंह) एक आम युवक होता है, जिसकी जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल जाती है। परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने के लिए वह हिंसा का रास्ता अपनाता है और जेल पहुंच जाता है।

बाद में आईबी अधिकारी अजय सान्याल (आर माधवन) उसे एक मिशन के तहत नई पहचान के साथ दुश्मन देश भेजते हैं। वहां वह हमजा अली मजारी बनकर साजिशों के जाल में उतरता है।

कहानी आगे सत्ता, बदले और अंडरवर्ल्ड के खेल के इर्द-गिर्द घूमती है। हालांकि, कई ट्विस्ट पहले से अनुमानित लगते हैं, जिससे फिल्म का रोमांच थोड़ा कम हो जाता है।

अभिनय

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत रणवीर सिंह हैं। उन्होंने अपने किरदार में पूरी ऊर्जा और गंभीरता झोंक दी है। एक्शन हो या इमोशन—हर सीन में उनका प्रदर्शन मजबूत नजर आता है।

अर्जुन रामपाल को इस बार ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन उनका किरदार उतना प्रभावशाली नहीं बन पाया।
संजय दत्त सीमित भूमिका में ही नजर आते हैं।

वहीं आर माधवन अपनी मौजूदगी से फिल्म को संभालते हैं और उनके सीन खास असर छोड़ते हैं।
राकेश बेदी एक बार फिर सरप्राइज पैकेज बनकर उभरते हैं, खासकर क्लाइमैक्स में।

निर्देशन

फिल्म का निर्देशन आदित्य धर ने किया है। उनकी रिसर्च और बैकग्राउंड डिटेलिंग सराहनीय है, लेकिन इस बार कहानी उतनी टाइट नहीं लगती।

पहले पार्ट में जहां हर मोड़ पर सरप्राइज था, वहीं इस बार कई सीन पहले से अंदाजा लगाने लायक हैं।
एक्शन सीन अच्छे हैं, लेकिन कुछ जगहों पर जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं, जिससे फिल्म की गति धीमी हो जाती है।

संगीत

म्यूजिक इस बार औसत है। एक-दो गाने ठीक हैं, लेकिन कोई भी गाना खास याद नहीं रहता। कुछ गाने कहानी में फिट नहीं बैठते।

देखें या नहीं?

अगर आपने पहला पार्ट पसंद किया था, तो यह फिल्म एक बार देखी जा सकती है।
लेकिन बहुत ज्यादा उम्मीदों के साथ जाएंगे, तो हल्की निराशा हो सकती है।

कुल मिलाकर, ‘धुरंधर 2’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें दमदार अभिनय और मजबूत क्लाइमैक्स है, लेकिन लंबी अवधि और कमजोर स्क्रीनप्ले इसे पहले पार्ट जितना प्रभावशाली नहीं बनने देते।

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