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 जंग के धुएँ से ‘काली बारिश’ का खतरा, स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर

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मिडिल ईस्ट में हाल ही में तेल और गैस फील्ड पर हुए हमलों के बाद उठता काला धुआं अब सिर्फ युद्ध की कहानी नहीं रह गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह धुआं आबोहवा को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे बारिश जहरीली और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बन सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, तेल और गैस ठिकानों पर लगी आग से निकलने वाले कण फिजा में फैलकर जमीन पर लौट सकते हैं। ऐसी ‘काली बारिश’ में कालिख, जहरीली गैस, एसिडिक पदार्थ और तेल जलने से बने खतरनाक कण शामिल होते हैं। इससे आंखों में जलन, स्किन पर रिएक्शन, गले में खराबी और सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं।

तेल के जलने से बनने वाले फाइन पार्टिकल्स फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और अस्थमा, हार्ट प्रॉब्लम, माइग्रेन, खांसी और सीने में जलन जैसी दिक्कतों को बढ़ा सकते हैं। भारत समेत अन्य देशों के लिए यह अलर्ट बड़ा है, क्योंकि लंबी जंग और तेल ठिकानों पर आग का सिलसिला मौसम, हवा और समुद्री रूट्स के जरिए हेल्थ रिस्क को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दुनिया के मौसम पर जंग का असर बढ़ता है, तो इंसानों की सेहत पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में सावधानी बरतना जरूरी है।

स्वास्थ्य बचाव के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक उपायों को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जाए। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और प्राकृतिक उपायों से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाई जा सकती है और बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

 

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