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प्राथमिक शाला खैरगुड़ा में विदाई समारोह व न्यौता भोज का भव्य आयोजन: शिक्षा, संस्कार और समुदाय का अनुपम संगम

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बस्तर। बस्तर विकासखंड के संकुल केंद्र कुंडगुड़ा के अंतर्गत संचालित प्राथमिक शाला खैरगुड़ा का परिसर शुक्रवार को एक ऐतिहासिक और भावपूर्ण दिन का साक्षी बना। विद्यालय प्रांगण में कक्षा पांचवीं के बच्चों के लिए विदाई समारोह के साथ न्यौता भोज का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक औपचारिक रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रहा बल्कि शिक्षा, संस्कार और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत उत्सव बन गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों से लेकर आम ग्रामीणों तक की उत्साहपूर्ण और सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। पूरे परिसर में उल्लास, अपनापन और भावुकता का अद्भुत संगम दिखाई दिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जिला पंचायत सदस्य शकुंतला कश्यप उपस्थित रहीं और कार्यक्रम की अध्यक्षता सरपंच कुंडगुड़ा ईश्वर मंडावी ने की। मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा मंडल अध्यक्ष बस्तर सुखदेव मंडावी, जनपद सदस्य समली कश्यप, उपसरपंच कुंडगुड़ा सामबती ठाकुर तथा वरिष्ठ नागरिक तयसिंह ठाकुर विराजमान रहे। इनके साथ ही ग्राम पटेल उर्धेश्वर ठाकुर, संजय सिंह ठाकुर, गिरीराम, मनोज कुमार,केशव ठाकुर, लोकनाथ ठाकुर,  झुमुकलाल, टिकमचंद ,जगरू कश्यप,भूषण बघेल,कुसुम शार्दूल, जंयती,बालमती, कुसुमलता, हेमबती, उर्मिला, भूमिता, बालमती ठाकुर, सतबती, माधुरी, मंदना, आयती समेत बड़ी संख्या में वरिष्ठ नागरिक, पालकगण, स्व-सहायता समूह की महिलाएं और ग्रामीणजन सपरिवार उपस्थित थे। अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति ने विद्यालय परिवार और बच्चों का उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाध्यापक छन्नूराम मंडावी के कुशल नेतृत्व में हुए आत्मीय स्वागत से हुई। शिक्षिका इंदुमती बाई, संकुल समन्वयक कृष्णा सिंह ठाकुर, शिक्षक लोकेश्वर यदू, योगेंद्र कुमार निषाद एवं मनोज कुमार ठाकुर सहित समस्त शिक्षकगण ने पुष्पगुच्छ भेंट कर और तिलक लगाकर सभी अतिथियों का पारंपरिक रीति से अभिनंदन किया। स्वागत में दिखी सादगी और अपनापन ने माहौल को शुरुआत से ही पूरी तरह भावनात्मक बना दिया। इसके बाद समारोह का मुख्य आकर्षण बना बच्चों का सांस्कृतिक कार्यक्रम। नन्हे विद्यार्थियों ने बस्तर की समृद्ध लोकसंस्कृति को दर्शाते हुए पारंपरिक लोकगीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए। समूहगान, कविता पाठ और नाटिका के माध्यम से उन्होंने शिक्षा का महत्व और सामाजिक संदेश भी दिया। बच्चों की सहजता, आत्मविश्वास और मंच पर दिखी प्रतिभा को देखकर उपस्थित हर व्यक्ति भावविभोर हो गया और करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन करता रहा।
विदाई की बेला आते ही पूरा माहौल भावुक हो उठा। अगली कक्षा में जाने वाले बच्चों को शिक्षकों ने तिलक लगाकर, मुंह मीठा कराकर और स्मृति चिह्न भेंट कर स्नेहपूर्वक विदा किया। इस दौरान कई बच्चों और शिक्षकों की आंखें नम हो गईं। अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि श्रीमती शकुंतला कश्यप ने कहा कि बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं और इनकी नींव जितनी मजबूत होगी, हमारा समाज और राष्ट्र उतना ही सशक्त बनेगा। उन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे शिक्षकों के प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना की। सरपंच श्री ईश्वर मंडावी ने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और पालकों से अपील की कि वे बच्चों की पढ़ाई पर निरंतर ध्यान दें।
कार्यक्रम के दौरान शाला प्रबंधन समिति की ओर से एक अत्यंत अनुकरणीय पहल की गई। समिति द्वारा मुख्य अतिथि सहित सभी अतिथियों, विद्यालय के विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले माता-पिता, स्वयं सहायता समूह की सदस्यों, सफाई कर्मचारी एवं रसोईया को शाल व श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन सभी कर्मयोगियों के प्रति विद्यालय परिवार की कृतज्ञता का प्रतीक था जो परदे के पीछे रहकर विद्यालय को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने में दिन रात जुटे रहते हैं। इस पहल की सभी उपस्थित लोगों ने भूरि भूरि प्रशंसा की।
समारोह के अंतिम चरण में आयोजित न्यौता भोज ने सामुदायिक समरसता की एक नई मिसाल कायम की। भोजन की पूरी व्यवस्था में शिक्षकों के साथ पालकों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और ग्रामीण युवाओं ने कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग किया। मुख्य अतिथि, सरपंच, सभी जनप्रतिनिधि, शिक्षक, पालक और नन्हे बच्चे, सभी ने सामाजिक भेदभाव भुलाकर एक साथ पंगत में बैठकर प्रेमपूर्वक भोजन ग्रहण किया। इस सामूहिक भोज ने यह संदेश दिया कि प्राथमिक शाला केवल ईंट और गारे क…

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