बलरामपुर संवाददाता युसूफ खान
बलरामपुर। कृषि एवं आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने वनमंडलाधिकारी कार्यालय परिसर में निर्मित ‘वन शहीद स्मारक’ का विधिवत लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने वनों एवं वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर वनकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी वन शहीदों के सम्मान में मौन रखकर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री श्री नेताम ने कहा कि वनकर्मी सीमित संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करते हुए जंगलों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वन संपदा की रक्षा करते हुए कई वनकर्मियों ने अपने प्राण न्यौछावर किए हैं, जिनका बलिदान समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे वीरों की स्मृति को संजोने के लिए ‘वन शहीद स्मारक’ का निर्माण एक सराहनीय पहल है।

वनाग्नि रोकने के लिए सतर्कता जरूरी
मंत्री श्री नेताम ने गर्मी के मौसम में बढ़ते वनाग्नि के खतरे को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जंगलों में लगने वाली आग से पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे जंगलों में आग लगाने से बचें और किसी भी प्रकार की आग की सूचना तुरंत वन विभाग को दें। उन्होंने कहा कि छोटी-सी लापरवाही भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए सभी को मिलकर वनाग्नि रोकने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी पर जोर
उन्होंने कहा कि वनों का संरक्षण केवल सरकार या वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी से ही यह संभव है। मंत्री श्री नेताम ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने, जैव विविधता के संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से भी पर्यावरण संरक्षण के अभियान से जुड़ने की अपील की।

वन शहीदों की स्मृति रहेगी अमर
मंत्री श्री नेताम ने कहा कि ‘वन शहीद स्मारक’ आने वाली पीढ़ियों को वनकर्मियों के त्याग और समर्पण की याद दिलाता रहेगा। उन्होंने आशा जताई कि यह स्मारक वन संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण संरक्षण और वनाग्नि रोकने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।







