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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में विराजित गंगरेल छोर पर स्थित मां अंगारमोति माता बना आस्था के केंद्र साथ जुआ शराब का अड्डा

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खिलेश साहू/धमतरी –

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध के किनारे स्थित मां अंगारमोती मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां दूर-दूर से न केवल अन्य प्रदेश से लोग माता के दर्शन और मनोकामना पूर्ति के लिए पहुंचते हैं,

आस्था व विश्वास का बड़ा केंद्र
गंगरेल में विराजित मां अंगारमोती को 52 गांवों की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा पूरी होती है। खासकर संतान प्राप्ति के लिए यहां बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं।

मड़ई मेले में उमड़ती भीड़
दीपावली के बाद पहले शुक्रवार को यहां भव्य मड़ई मेला आयोजित होता है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं और आस्था का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। कई महिलाएं संतान प्राप्ति की कामना से मंदिर परिसर में विशेष परंपरा निभाती हैं, जिसे स्थानीय लोग बेहद श्रद्धा से देखते हैं,इसी बीच रविवार व शुक्रवार को माता के दरबार मे बलि के रूप में एक जीव की बलि दी जाती है दूर दराज से आय लोग पूरी श्रद्धा के साथ पूजा अर्चना के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं , लेकिन भोजन और प्रसाद के नाम पर माता के दरबार और गंगरेल प्रांगण में लोग शराब पी कर अभद्र और अनुचित व्यवहार करते नजर आ रहे है साथ ही कुछ लोगो का ताश जुआ खेलते नजर आ रहे है जो कि स्थानीय शासन और प्रशासन पर बड़ा सवाल खड़ा करता है अगर कोई अप्रिय घटना घट जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा।

अनोखी परंपरा और मान्यता
यहां एक विशेष धार्मिक परंपरा के तहत निसंतान महिलाएं जमीन पर लेटकर देवी से संतान सुख की कामना करती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इतिहास और स्थापना
बताया जाता है कि गंगरेल बांध बनने (1970 के दशक) के दौरान यह क्षेत्र डूबान में आ गया था। तब आसपास के 52 गांवों के लोगों ने माता की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर स्थापित किया। तभी से यह स्थान लगातार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है।

नवरात्रि में विशेष भीड़
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं।

कुल मिलाकर, गंगरेल का मां अंगारमोती मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक आस्था, परंपरा और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जहां हर साल लाखों लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।

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