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हमर आंगनवाड़ी, हमर अभिमान: आंगनवाड़ी शिक्षिका कॉन्फ्रेंस सम्पन्न, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर हुआ मंथन

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संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जांजगीर। एकीकृत बाल विकास परियोजना जांजगीर एवं अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन, जांजगीर-चांपा के संयुक्त तत्वावधान में “हमर आंगनवाड़ी, हमर अभिमान” थीम पर आंगनवाड़ी शिक्षिकाओं का दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) अनीता अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के सर्वांगीण विकास की मजबूत नींव बताते हुए शिक्षिकाओं की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। वहीं बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) अनिमा मिश्रा ने खेल-आधारित एवं गतिविधि-आधारित शिक्षण पर विशेष जोर दिया।
इस सम्मेलन में 135 से अधिक शिक्षिकाओं ने भाग लिया, जिनमें से 22 शिक्षिकाओं ने अपने अनुभव साझा किए। शिक्षकों ने अपने प्रेजेंटेशन में मुख्य रूप से 7 मानकों को हाइलाइट करते हुए बताया कि वे इन मानकों पर कार्य करने का पूरा प्रयास कर रहे हैं, जो आंगनवाड़ी को बेहतर रूप से संचालित करने के मील के पत्थर हैं। साथ ही यह भी साझा किया गया कि आगामी सत्रों में इन 7 मानकों को और अधिक प्रभावी ढंग से पूर्ण रूप से लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
पहले दिन कविता गढ़वाल ने स्थानीय खेलों पर, अंजली तिवारी एवं तनुजा ने कहानी प्रस्तुतिकरण पर, संतोषी तंवर एवं सुभाषिनी ने ईसीसीई दिवस के महत्व पर, ज्योति नागपाल ने शारीरिक विकास पर, शारदा सिंह एवं लता कश्यप ने बालगीतों पर, वर्षा फरेस एवं शांति देवी ने खेल-खेल में सीखने पर तथा पूर्णिमा मेहरा ने ‘सुनना, गुनगुनाना और सीखना’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
दूसरे दिन प्रीति लसार ने सीखने के कोनों पर, उमा पांडे ने बालगीत एवं कहानी पर, अंजली गढ़ेवाल ने रचनात्मक विकास पर, हेमलता रत्नाकर ने आदत निर्माण पर, अचला ने प्रिंट-रिच वातावरण के महत्व पर, वर्षा ने संज्ञानात्मक विकास पर, पार्वती ने रचनात्मक गतिविधियों पर, सावित्री ने बालगीत एवं कहानी पर, चांदनी ने संज्ञानात्मक विकास पर तथा कुसुम कली और सुशील सूर्यवंशी ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए।
सम्मेलन के दौरान शिक्षिकाओं ने अपने कार्यों के संकलन को विभिन्न स्टॉल्स के माध्यम से प्रदर्शित किया। इन स्टॉल्स में रचनात्मक कोना, भाषाई कोना, बौद्धिक कोना, आकलन कोना, शारीरिक कोना और पोषण कोना शामिल थे, जहां विभिन्न TLMs (शिक्षण-सहायक सामग्री) एवं बच्चों के कार्यों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इसमें जांजगीर परियोजना की सुपरवाइजर रिचा तिवारी, श्वेता तिवारी, शिप्रा साहू, प्रीति सिंह, संतोषी कंवर, इंदु चंद्रा, नवधा राठिया की सक्रिय भागीदारी रही।
पहले दिन के पैनलिस्ट के रूप में तुलाराम कश्यप (CAC), रामेश्वर आदित्य (CAC), योगेश्वरी तंबोली (शिक्षक) एवं सलखन सेक्टर की सुपरवाइजर अर्चना साव उपस्थित रहीं। वहीं दूसरे दिन दीप्ति सिंह राठौर (शिक्षक), चंद्रशेखर देवांगन (शिक्षक) एवं केरा सेक्टर की सुपरवाइजर अश्वनी कौशिक ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रस्तुतियों पर मार्गदर्शन प्रदान किया।
शिक्षिकाओं ने साझा किया कि गतिविधि-आधारित शिक्षण से बच्चे सहज और आनंदपूर्ण तरीके से सीखते हैं, जिससे उनके समग्र विकास को बढ़ावा मिलता है। अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस सम्मेलन को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे आंगनवाड़ी केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।

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