लखनपुर संवाददाता विकास अग्रवाल
लखनपुर।।
वन परिक्षेत्र लखनपुर के जंगलों में आग लगने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसी कड़ी में बीते 27 अप्रेल को लखनपुर बीट के जूनाडीह कुंवरपुर जंगल में अज्ञात कारणों से आग लग गई इस दावानल में साल सागौन शिशम अन्य प्रजाति के तैयार होने वाले नवजात पौधे झूलस गये प्रत्येक्ष दर्शियों का बताना है कि महुआ फूल संग्रहित करने का सीजन निकल गया है लेकिन आसपास के ग्रामीण जंगल में अवैध कटाई करने के मकसद से जंगलों में आग लगा दे रहे हैं ताकि जलावन बनाने लकड़ी आसानी से ले जाया जा सके। संभवतः छोटे पौधों की कटाई करने के नजरिए से जंगल में आग लगाई गई होगी। लगाने वाले ने आग लगा दी वन अमला दूर से देख कर आग बुझाने का भूमिका अदा करती रही। लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
दहकते आग के साये में जंगल के असंख्य दरख्त जलकर तबाह हो गये। जले पेड़ खुद अपनी बर्बादी का सच बयां कर रहे हैं। आग लगने का
काला सच जिसमें अनगिनत तैयार होने वाले नवजात पौधे झूलस कर नेस्तनाबूद हो गये। एक कुंवरपुर जंगल की बात नहीं है निगरानी नियंत्रण के अभाव में दूसरे जंगलो में भी विनाश की आग लगती रही है। जिनको जंगल के भरे दरख्तों के हिफाजत की जिम्मेदारी सौंपी गई है वह वन अमला तमाशबीन बन कर तबाही का तमाशा देख रही है।
वन परिक्षेत्र लखनपुर अंतर्गत आने वाले तमाम बीटो में लगने वाली आग की चर्चा गरम है । डिपार्टमेंट के कारिंदों को जलते जंगल को देखने तक की फुर्सत नहीं है। एक दिन पहले रविवार को आग लगने का भयानक नजारा आम लोगों तथा जनप्रतिनिधियों ने फैलपुर चौक के समीप जंगल में देखा । जहां सबकुछ जल जाने के बाद वन अमला पहुंची।
इस दावानल में अनगिनत पौधे जलकर भस्म हो गये ।
इसी कड़ी में सोमवार को लखनपुर बीट के कुंवरपुर जंगल में आग लग गई । वन अमला जागते हुए भी सोती रही। बताया जा रहा है कि वन अमला वक्त पर आग बुझाने नहीं पहुंची।
जलकर राख हुये नवजात पौधों तथा अधजले पेड़ों के निशान अब भी बाकी है। जंगलों के अस्मिता पर सवाल उठने लगे हैं। इतना ही नहीं अवैध कटाई तथा लकड़ी तस्करों द्वारा रात के अंधेरे में बेशकीमती ईमारती लकड़ी चोरी किये जाने की बात सरे बाजार कही जा रही है। आगजनी अवैध कटाई ये सब मिलकर जंगलों को नेस्तनाबूत कर रहे हैं।
वन विभाग है कि मौन साधे हुए हैं फायर वाचरो की कार्यशैली समझ के परे है आग अवैध कटाई इमारती लकड़ियों की निरंतर चोरी से जंगलों के सघनता हरियाली पर खतरा मंडराने लगा है। वन गस्ती दस्ता सिर्फ वेतन लाभ ले रही है। वहीं इनके क्रिया कलापों कारगुजारियों पर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगो को वन अमला के भरोसे पर भरोसा नहीं रहा है।
कुछ क्षेत्र वासियों का कहना है वन वर्दी से
सांठगांठ बना बड़े लकड़ी तस्कर इमारती लकड़ियों की चोरी कर रात के अंधेरे में ले जा रहे हैं। बनने वाले बड़े बड़े इमारतों में इन इमारती लकड़ियों को खपाया जा रहा है।
आलम यह है कि जंगलो से पेड़ों की तादाद आहिस्ता आहिस्ता घटने लगी है। इस तरह से जंगल का अस्तित्व मिटता जा रहा है। शासन प्रशासन द्वारा एक पेड़ मां के नाम अभियान चला कर पेड़ लगाने आम जनता को प्रेरित किया जा रहा है वहीं जंगलों से हरियाली मिटती जा रही है। वह दिन दूर नहीं जब आने वाले पीढ़ी के लिए जंगल में पेड़ नहीं सिर्फ पत्थर ही पत्थर होंगे।








