भारत की आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण का प्रतीक माने जाने वाले सोमनाथ मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है। यह मंदिर केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि इसे भारत की सांस्कृतिक चेतना और पुनर्जागरण का प्रतीक भी माना जाता है। कई बार हमलों और विध्वंस के बावजूद सोमनाथ बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। हालांकि महात्मा गाँधी सरकारी धन से मंदिर निर्माण के पक्ष में नहीं थे। उनका मानना था कि मंदिर का निर्माण जनता के सहयोग से होना चाहिए। इसके बाद सोमनाथ ट्रस्ट का गठन किया गया और जनसहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया। वहीं तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु ने मंदिर उद्घाटन समारोह से दूरी बनाई थी, जबकि भारत के पहले राष्ट्रपतिडॉ राजेन्द्र प्रसाद ने 11 मई 1951 को पुनर्निर्मित मंदिर का उद्घाटन किया था।
अब उसी ऐतिहासिक उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमनाथ पहुंचेंगे और “सोमनाथ अमृत महोत्सव” में हिस्सा लेंगे।
आज सोमनाथ में क्या-क्या होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह करीब 10:15 बजे सोमनाथ अमृत महोत्सव कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मंदिर परिसर में विशेष महापूजा, कुंभाभिषेक और ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
75वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष ₹75 का स्मारक सिक्का जारी किया जाएगा।
यह सिक्का सोमनाथ मंदिर की तस्वीर और “भारत की अटूट आस्था और श्रद्धा के 1000 वर्ष” संदेश के साथ जारी होगा।
कार्यक्रम में मंदिर के पुनर्निर्माण और भारत की सांस्कृतिक विरासत पर विशेष प्रस्तुति भी दी जाएगी।
बड़ी संख्या में साधु-संत, श्रद्धालु और विभिन्न राज्यों से आए अतिथि समारोह में मौजूद रहेंगे।
क्यों खास है यह अवसर?
साल 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए दो बड़े ऐतिहासिक पड़ाव लेकर आया है। एक तरफ 1026 में हुए पहले हमले के 1000 वर्ष पूरे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुनर्निर्मित मंदिर के उद्घाटन के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। इसी कारण पूरे वर्ष “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” और “अमृत महोत्सव” जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी सोमनाथ को “विध्वंस से सृजन तक भारत की अदम्य यात्रा” का प्रतीक बताया है।








