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धान खरीदी की सुखत राशि को लेकर सहकारी समिति ने शासन से लगाई राहत की गुहार

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खिलेश साहू

छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित रायपुर के अंतर्गत संचालित धान उपार्जन केंद्रों में खरीफ विपणन वर्ष के दौरान धान खरीदी में हुई “सूखत” (वजन में कमी) की भरपाई को लेकर सहकारी समितियों ने शासन से राहत प्रदान करने की मांग की है। समितियों ने शासन स्तर पर सूखत राशि का निराकरण करने अथवा कुल धान खरीदी पर 1 प्रतिशत अतिरिक्त सूखत राशि प्रदान किए जाने की मांग उठाई है।समितियों द्वारा दिए गए निवेदन में कहा गया है कि जिले के सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों से धान खरीदी की गई। खरीदी के दौरान परिवहन में देरी और भंडारण संबंधी परिस्थितियों के कारण धान के वजन में कमी आई, जिसकी भरपाई वर्तमान में समिति स्तर पर की जाती है। इससे समितियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

आवेदन में बताया गया कि इस वर्ष धान का बफर लिमिट सामान्य से 3 से 4 गुना अधिक रहा। साथ ही धान परिवहन में विलंब होने से सूखत और वजन में कमी की समस्या और बढ़ गई। समितियों का कहना है कि यदि इस पूरी राशि की भरपाई समिति स्तर पर की जाएगी तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।समितियों ने यह भी उल्लेख किया कि धान खरीदी के समय धान में लगभग 16 प्रतिशत नमी रहती है, लेकिन परिवहन में देरी होने के कारण उपार्जन केंद्रों में ही नमी घटकर लगभग 12 प्रतिशत रह जाती है। इस स्थिति में धान का वजन स्वाभाविक रूप से कम हो जाता है। जबकि वर्तमान व्यवस्था में संग्रहण केंद्रों को सूखत राशि प्रदान की जाती है, लेकिन उपार्जन केंद्रों को इसका लाभ नहीं मिल पाता।

आवेदन में नवंबर और दिसंबर माह में सुबह एवं शाम की तौल में भी अंतर का हवाला दिया गया है। समितियों के अनुसार एक ही दिन में धान की तौल में 250 से 300 ग्राम तक का अंतर देखा गया, जो धान में तेजी से सूखत आने का प्रमाण है।इसके अलावा इस वर्ष कई राइस मिलों का डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) देरी से जारी होने के कारण धान परिवहन मार्च-अप्रैल तक चला। जबकि धान की कटाई नवंबर-दिसंबर में हो चुकी थी। करीब 3 से 4 महीने तक धान उपार्जन केंद्रों में पड़े रहने के कारण प्रति कट्टा 1.5 से 2 किलोग्राम तक वजन कम हुआ। औसतन प्रति क्विंटल 4 से 5 किलोग्राम तक सूखत आने का दावा किया गया है।

समितियों ने शासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि संग्रहण केंद्रों में भी प्रति कट्टा 2 किलोग्राम सूखत मान्य किया जा रहा है। ऐसे में उपार्जन केंद्रों को कम से कम 1 प्रतिशत अतिरिक्त सूखत राशि प्रदान किया जाना न्यायसंगत होगा।समितियों ने शासन से सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की है, ताकि सहकारी समितियों को आर्थिक राहत मिल सके और वे भविष्य में भी सुचारू रूप से धान खरीदी कार्य किया जा सके।

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