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रायपुर में इंसानियत शर्मसार: सुशासन तिहार में मिला था आश्वासन, दो दिन बाद ही बिना नोटिस विकलांग महिला की गुमटी पर चला नगर निगम का जेसीबी, सदमे में आत्महत्या करने रेलवे ट्रैक पर पहुंची पीड़िता को पुलिस ने बचाया

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। राजधानी रायपुर से एक बेहद दिल दहला देने वाली और प्रशासनिक क्रूरता की पराकाष्ठा सामने आई है। गुढ़ियारी क्षेत्र में एक गरीब, शारीरिक रूप से विकलांग महिला की रोजी-रोटी को नगर निगम के अमले ने बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के बेरहमी से उजाड़ दिया। इस घटना से टूट चुकी और गहरे सदमे में डूबी महिला अपने जीवन को समाप्त करने के लिए रेलवे लाइन पर जाकर सो गई थी, जिसे गनीमत रही कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने समय रहते देख लिया और उसकी जान बचाई। यह पूरी घटना अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग नगर निगम की इस अमानवीय कार्रवाई पर थू-थू कर रहे हैं।
यह दर्दनाक दास्तां लक्ष्मी बिसवाल की है, जो रायपुर के गोंडवारा अंडर ब्रिज के पास एक छोटी सी गुमटी (चाय-पानी की दुकान) चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं। लक्ष्मी बिसवाल खुद शारीरिक रूप से पूरी तरह दिव्यांग हैं और उनके पति लक्ष्मी नारायण बिसवाल भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस बेसहारा और आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर परिवार के पास अपनी दवाइयों का खर्च निकालने और दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने का एकमात्र जरिया यही छोटी सी गुमटी थी। हालांकि यह गुमटी रेलवे क्षेत्र के अंतर्गत आती है, लेकिन वहां के स्थानीय रेलवे अधिकारियों ने महिला की लाचारी, उसकी शारीरिक विकलांगता और दयनीय स्थिति को देखते हुए मानवीय आधार पर उसे कभी वहां से नहीं हटाया और हमेशा मौखिक रूप से सहानुभूति दिखाई।
लेकिन असली प्रताड़ना का खेल नगर निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा खेला जा रहा था। पीड़िता लक्ष्मी बिसवाल का आरोप है कि नगर निगम के लोग अक्सर उनकी दुकान पर आकर उन्हें तंग करते थे। वे न केवल दुकान से मुफ्त में सामान ले जाते थे और पैसे देने से मना करते थे, बल्कि बार-बार दुकान हटाने की धमकी देकर अवैध रूप से पैसों की मांग भी करते थे। रोज-रोज की इस मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना से तंग आकर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया।
दो दिन पहले ही मारुति मंगलम गुढ़ियारी में सुशासन तिहार का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक श्री राजेश मूणत और रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे भी उपस्थित थीं। लक्ष्मी बिसवाल ने भारी उम्मीदों के साथ इस सामूहिक मंच पर अपनी आपबीती सुनाई और नगर निगम के कर्मचारियों की शिकायत दर्ज कराई। वहां मौजूद जनता और सीसीटीवी कैमरों के सामने माननीय विधायक जी ने महिला को स्पष्ट आश्वासन दिया कि जब तक उनके पुनर्वास या किसी वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनकी दुकान को कोई नहीं छुएगा। महापौर ने भी इस बात पर अपनी सहमति जताई और महिला को पूरी सुरक्षा का भरोसा दिया।
इस बड़े आश्वासन के बाद लक्ष्मी और उनके बीमार पति राहत की सांस लेकर अपने घर लौटे और पिछले दो दिनों से सुकून से अपना छोटा सा व्यापार कर रहे थे। उन्हें लगा कि अब सरकार और प्रशासन उनकी बात सुन चुका है, इसलिए वे सुरक्षित हैं। लेकिन उनका यह भ्रम आज दोपहर उस समय चकनाचूर हो गया जब दोपहर के बारह से एक बजे के बीच नगर निगम की अधिकारी मैडम अंकिता अपने पूरे लाव-लश्कर और जेसीबी मशीन के साथ वहां धमक पड़ीं।
बिना किसी चेतावनी के नगर निगम के अमले ने सीधे गरीब दिव्यांग महिला की गुमटी पर जेसीबी चलाना शुरू कर दिया। जब रोती-बिलखती लक्ष्मी ने अधिकारियों से इस बर्बरता का कारण पूछा और लिखित नोटिस की मांग की, तो उन्हें कोई नोटिस नहीं दिखाया गया। मैडम अंकिता ने साफ कह दिया कि उन्हें सिर्फ दुकान तोड़ने का आदेश है। पीड़िता ने हाथ जोड़कर, पैरों में गिरकर गिड़गिड़ाते हुए सिर्फ एक दिन का, या महज एक घंटे का समय मांगा ताकि वह अपनी गुमटी और उसमें रखा कीमती सामान सुरक्षित हटा सके। लेकिन प्रशासन के दिल में जरा भी रहम नहीं जागा। उन्होंने एक मिनट का समय भी नहीं दिया और देखते ही देखते उस गरीब परिवार के आशियाने और आजीविका को मलबे में तब्दील कर दिया। दुकान के भीतर रखा सारा महंगा सामान, दवाइयां और राशन सड़कों पर बिखर कर नष्ट हो गया।
अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी की एकमात्र उम्मीद को इस तरह जमींदोज होते देख लक्ष्मी बिसवाल पूरी तरह मानसिक संतुलन खो बैठीं। व्यवस्था के इस क्रूर चेहरे और हर तरफ से मिली निराशा के बाद उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त करने का आत्मघाती कदम उठाया। वह भागते हुए पास के रेलवे ट्रैक पर चली गईं और पटरियों पर लेट गईं। खुशकिस्मती से वहां गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों की नजर उन पर पड़ गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत दौड़कर महिला को पटरियों से खींचकर हटाया और उनकी जान बचाई। अगर पुलिस मौके पर न होती, तो आज रायपुर में एक गरीब दिव्यांग महिला प्रशासनिक तानाशाही की भेंट चढ़ चुकी होती।
इस पूरी घटना ने रायपुर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ जहां सुशासन तिहार जैसे बड़े आयोजनों में मंच से गरीबों को संरक्षण देने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के आश्वासनों को भी ठेंगे पर रख देते हैं। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
पीड़िता लक्ष्मी बिसवाल ने अब पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों से हाथ जोड़कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि बिना नोटिस के उनके पेट पर लात मारने वाली नगर निगम की अधिकारी मैडम अंकिता और उनके साथियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और उन पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। एक दिव्यांग और बीमार परिवार को आत्महत्या की कगार पर धकेलने वाले इन अधिकारियों को सजा मिलना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही पीड़ित परिवार ने मांग की है कि उन्हें न्यायसंगत मुआवजा दिया जाए और उनकी गुमटी को दोबारा स्थापित करने की व्यवस्था की जाए। देखना होगा कि इस संवेदनशील मामले में प्रशासन अब क्या रुख अपनाता है और क्या इस गरीब महिला को सच में न्याय मिल पाता है या नहीं।

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