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मोरध्वज नगरी आरंग में सतत मिल रहे दुर्लभ पांडुलिपि पोथी, 1946 का मिला हस्तलिखित भजन संग्रह

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आरंग संवाददाता – सोमन साहू
आरंग
ऐतिहासिक और प्राचीन नगरी आरंग में अतीत के पन्नों से पुरानी पांडुलिपि  मिलने का सिलसिला जारी है। भारत सरकार के ज्ञानभारतम मिशन’ के तहत आरंग में पिछले कुछ समय से 75 से 100 वर्ष से भी अधिक पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपियां व पोथियां प्राप्त हो रही हैं।इसी कड़ी में रविवार को आरंग के अग्रवाल पारा निवासी दाऊ रविंद्र अग्रवाल माता पिता ( स्व नारायण लाल अग्रवाल एवं स्व कांता देवी अग्रवाला) के निवास से 1946 के हस्तलिखित पत्र व भजन माला एवं  वर्ष 1928 से 1930 के कालखंड की पोथियां भी मिली हैं, जो आदित्य हृदय स्तोत्र व बागवानी से संबंधित है।
वहीं श्री अग्रवाल ने अपने परिसर में स्थित लगभग 200 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक कुएं और तुलसी चौरे होने की महत्वपूर्ण जानकारी भी सर्वेक्षण टीम के साथ साझा किया
जो उस समय की क्षेत्र की प्राचीन जीवनशैली और संस्कृति को दर्शाती है।गौरतलब है कि आरंग क्षेत्र में यह गौरवशाली अभियान कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह एवं जिला पंचायत सीईओ कुमार विश्वरंजन के कुशल मार्गदर्शन में सुचारू रूप से चलाया जा रहा है।
उच्च अधिकारी गण अभिलाषा पैंकरा,अभिलाष बनर्जी,दिनेश शर्मा,शीतल चंद्रवंशी आदि के मार्गदर्शन में सर्वे टीम से शिक्षक महेन्द्र कुमार पटेल, प्रधान पाठक अरविंद कुमार वैष्णव, शिक्षिका शीला गुरु गोस्वामी व नोडल अजय ध्रुव नगर व क्षेत्र के दुर्लभ पोथियों व हस्तलिखित पांडुलिपियों को सहेजने का कार्य कर रहे हैं।इस महत्वपूर्ण पोथियों व हस्तलिखित पांडुलिपियों की जानकारी विशेष रूप रविन्द्र अग्रवाल,श्रीमती मालिनी अग्रवाल, रिया अग्रवाल, राहुल अग्रवाल, ओम अग्रवाल ने  दी।

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