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पित्त दोष बढ़ने के संकेत: जानें कारण, लक्षण और इसे नियंत्रित करने के असरदार आयुर्वेदिक उपाय

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आयुर्वेद शरीर में उत्पन्न दोषों के आधार और उनके समाधान पर काम करता है। आयुर्वेद के मुताबित शरीर में तीन तरह के दोष पाए जाते हैं। जिसमें कुछ लोग वात प्रकृति के होते हैं, कुछ लोग कप प्रकृति के और कुछ पित्त प्रकृति के होते हैं। जो लोग पित्त प्रकृति के होते हैं उन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आने लगता है, शरीर से तेज दुर्गंध आती है, ऐसे लोगों के शरीर में पित्त ज्यादा होता है। पित्त दोष अग्नि और जल से मिलकर बनता है। ये शरीर में बनने वाले हार्मोन और एंजाइम को कंट्रोल करता है। शरीर का तापमान और पाचक अग्नि पित्त से ही कंट्रोल होती हैं। शरीर में पेट और छोटी आंत में पित्त ज्यादा पाया जाता है। इसका कंट्रोल रहना जरूरी है। क्योंकि ज्यादा पित्त बनने से पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे कि कब्ज़, अपच, एसिडिटी हो सकती है। पित्त का असंतुलन पाचन अग्नि को कमजोर बना सकता है। जिससे खाना ठीक से पच नहीं पाता है। आइये जानते हैं पित्त दोष को कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?

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