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हिंद मल्टी सर्विसेज की विस्तार परियोजना पर उठे गंभीर सवाल, स्वतंत्र जांच और स्वीकृति स्थगन की मांग

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संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल

जिला जांजगीर-चांपा। जांजगीर चांपा के ग्राम बिरगहनी, तहसील बलौदा स्थित हिंद मल्टी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (पूर्व नाम हिंद एनर्जी एंड कोल बेनिफिसिएशन इंडिया लिमिटेड) की प्रस्तावित कोल वॉशरी विस्तार एवं 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ के संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे ने परियोजना के विरुद्ध 53 बिंदुओं का विस्तृत आपत्ति-पत्र प्रस्तुत करते हुए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच तथा सभी प्रकार की स्वीकृतियों को स्थगित करने की मांग की है।
दीपक दुबे का कहना है कि यह मामला केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने का नहीं, बल्कि पिछले लगभग एक दशक से संचालित परियोजना की पर्यावरणीय जवाबदेही, जल संसाधनों पर प्रभाव, जनस्वास्थ्य, श्रमिक सुरक्षा, प्रदूषण नियंत्रण और सामाजिक दायित्वों की समग्र समीक्षा का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक मूल्यांकन अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है।
जल संसाधनों पर गंभीर चिंता
आपत्ति-पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2016 से संचालित परियोजना के कारण क्षेत्र के भूजल एवं सतही जल स्रोतों पर पड़ने वाले प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन कराया जाना आवश्यक है। इसके लिए वाटर अवेलेबिलिटी असेसमेंट, हाइड्रोजियोलॉजिकल स्टडी, ग्राउंडवॉटर ऑडिट, वाटर बैलेंस वेरिफिकेशन तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा मूल्यांकन जैसी जांच राष्ट्रीय स्तर की विशेषज्ञ संस्थाओं से कराने की मांग की गई है।
उत्पादन एवं राजस्व अभिलेखों की जांच की मांग दुबे ने स्थापना काल से अब तक के कोल कंट्रोलर रिटर्न, जीएसटी रिटर्न, रॉयल्टी रिकॉर्ड, डिस्पैच रिकॉर्ड, रेलवे रिकॉर्ड, ई-वे बिल तथा उत्पादन अभिलेखों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वास्तविक उत्पादन, परिवहन और राजस्व संबंधी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण होना चाहिए।
कोयला एवं अपशिष्ट प्रबंधन पर सवाल
आपत्ति-पत्र में कोयला, स्लरी, मिडलिंग, एचसीवी एवं एलसीवी रिजेक्ट सहित विभिन्न अपशिष्टों के भंडारण और प्रबंधन की स्थिति पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। मांग की गई है कि डीजीपीएस सर्वे, ड्रोन सर्वे तथा संयुक्त भौतिक सत्यापन कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए।
53 गांवों के पर्यावरण और स्वास्थ्य सर्वे की मांग
परियोजना के 10 किलोमीटर अध्ययन क्षेत्र में शामिल 53 गांवों के लिए ग्रामवार पर्यावरणीय प्रभाव आकलन, सामाजिक प्रभाव अध्ययन, जनस्वास्थ्य सर्वे तथा आजीविका प्रभाव अध्ययन कराने की मांग की गई है। साथ ही श्वसन रोगों, बच्चों के स्वास्थ्य और अन्य संभावित बीमारियों पर विस्तृत चिकित्सा अध्ययन कराने की भी मांग उठाई गई है।
प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थाओं की जांच हो
दीपक दुबे ने परियोजना के ओसीईएमएस, सीईएमएस, वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग, भूजल एवं सतही जल निगरानी तथा ध्वनि प्रदूषण से जुड़े सभी आंकड़ों को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने ग्रीन बेल्ट, बैग फिल्टर, ईएसपी, कवर कन्वेयर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और अन्य प्रदूषण नियंत्रण उपायों की संयुक्त स्थल जांच की मांग भी की है।
प्रस्तावित पावर प्लांट से फ्लाई ऐश का खतरा
प्रस्तावित 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट से प्रतिवर्ष लगभग 83,700 टन फ्लाई ऐश उत्पन्न होने की संभावना जताई गई है। आपत्ति-पत्र में फ्लाई ऐश उपयोग योजना, परिवहन व्यवस्था, निस्तारण रणनीति और संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की गई है।
श्रमिकों और सीएसआर गतिविधियों की जांच की मांग
परियोजना में कार्यरत श्रमिकों एवं संविदा कर्मियों को पीएफ, ईएसआई, सुरक्षा उपकरण, वेतन और अन्य श्रम अधिकारों का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी उठाई गई है। साथ ही स्थापना से अब तक कंपनी द्वारा किए गए सीएसआर खर्च, लाभार्थियों और परियोजनाओं का स्वतंत्र ऑडिट कराने की भी मांग की गई है।
वर्ष 2022 की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
दीपक दुबे ने वर्ष 2022 में हुई विभागीय जांच, निरीक्षण प्रतिवेदन, कारण बताओ नोटिस और कार्रवाई प्रतिवेदन को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा है कि जनता को परियोजना की वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार है।
स्वीकृतियां तत्काल स्थगित करने की मांग
भारतीय जनाधिकार पार्टी ने मांग की है कि जब तक सभी स्वतंत्र जांच, सत्यापन, ऑडिट और अध्ययन पूर्ण नहीं हो जाते तथा उनकी रिपोर्टों पर सार्वजनिक परीक्षण और जनभागीदारी सुनिश्चित नहीं होती, तब तक परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति, जल एवं भूजल अनुमति, क्षमता विस्तार तथा 25 मेगावाट एएफबीसी पावर प्लांट से संबंधित सभी अनुमतियां तत्काल प्रभाव से स्थगित रखी जाएं।
यह मामला अब केवल एक औद्योगिक परियोजना का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जनस्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और नियामकीय पारदर्शिता से जुड़ा महत्वपूर्ण जनहित का विषय बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन और पर्यावरणीय प्राधिकरण इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं, इस पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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