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राजेश तिवारी ने लिया मरणोपरांत देहदान का संकल्प, चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए समर्पित करेंगे अपना शरीर

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महानदी शीर्ष प्रबंधन उप संभाग 01, रुद्री (धमतरी) में सहायक फोरमैन के पद पर शासकीय सेवा में है कार्यरत

रिपोर्ट- खिलेश साहू
धमतरी- समाज में रूढ़िवादिताओं को पीछे छोड़ते हुए अंगदान और देहदान के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच धमतरी जिले से एक बेहद अनुकरणीय और प्रेरणादायक मामला सामने आया है। ग्राम मुजगहन निवासी और शासकीय सेवक राजेश तिवारी ने मृत्यु के पश्चात् अपने शरीर को चिकित्सा अनुसंधान और भावी डॉक्टरों की शिक्षा के लिए दान करने का ऐतिहासिक व पुनीत संकल्प लिया है। उनके इस निर्णय ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे समाज को गौरवान्वित किया है।
 राजेश तिवारी ने इस संबंध में पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (मेकाहारा), रायपुर के शरीर रचना विज्ञान विभाग में अपना आधिकारिक घोषणा पत्र (वसीयतनामा) विधिवत रूप से जमा कर दिया है। कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए इस संपूर्ण प्रक्रिया को नोटरी द्वारा प्रमाणित भी कराया जा चुका है।
राजेश तिवारी के इस साहसिक और मानवीय निर्णय में उनके पूरे परिवार ने संबल प्रदान किया है। उनके पुत्र  मयंक तिवारी ने इस वसीयतनामा में मृत्यु संबंधी सूचना देने वाले मुख्य जिम्मेदार रिश्तेदार के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, सामाजिक और पारिवारिक साक्षी के रूप में श्रीमती अंजना तिवारी एवं  डुमन लाल ध्रुव ने भी अपनी गवाही देकर इस कल्याणकारी निर्णय का पूरा समर्थन किया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एक मृत शरीर (कैडेवर) कई भावी डॉक्टरों, शोधकर्ताओं और सर्जनों को व्यावहारिक शिक्षा और जीवन रक्षक कौशल सिखाने में अमूल्य योगदान देता है। चिकित्सा विज्ञान की उन्नति के लिए देहदान को सबसे बड़ा दान माना गया है।
अनुकरणीय मिसाल पेश करने वाले राजेश तिवारी वर्तमान में महानदी शीर्ष प्रबंधन उप संभाग 01, रुद्री (धमतरी) में सहायक फोरमैन के पद पर शासकीय सेवा में कार्यरत हैं उनके सहकर्मियों और परिचितों ने उनके इस निर्णय की भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल ने दी बधाई, कहा- “यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय”
इस प्रेरक निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र के जनपद सदस्य कीर्तन मीनपाल ने राजेश तिवारी को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
कीर्तन मीनपाल ने कहा:
“राजेश तिवारी द्वारा लिया गया मरणोपरांत देहदान का यह संकल्प केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि मानवता की सेवा में उठाया गया एक क्रांतिकारी कदम है। यह कार्य ग्राम मुजगहन, धमतरी जनपद और हमारे पूरे समाज के लिए अत्यधिक गर्व और सम्मान का विषय है। अक्सर लोग पुरानी रूढ़ियों और सामाजिक बंधनों के कारण ऐसे फैसलों से हिचकिचाते हैं, लेकिन राजेश जी ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। उनका यह कदम अन्य नागरिकों को भी रूढ़िवादिताओं से ऊपर उठकर मानव सेवा और चिकित्सा विज्ञान की उन्नति के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करेगा। मैं उनके और उनके पूरे परिवार के इस जज्बे को नमन करता हूँ।”
श्री तिवारी का यह कदम समाज में ‘जीते जी रक्तदान-नेत्रदान और मृत्यु के बाद देहदान’ के संदेश को धरातल पर सच साबित करता है।

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