Home कोरबा कमीशन खोरी की भेंट चढ़ रहे हैं विकास कार्य, गुणवत्ता हाशिये पर…!!

कमीशन खोरी की भेंट चढ़ रहे हैं विकास कार्य, गुणवत्ता हाशिये पर…!!

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पाली संवाददाता – दीपक शर्मा
कोरबा/पाली
बढ़ती बेरोजगारी के बीच रोजगार की तलाश में बढ़ते ठेकेदारो ने पंचायत के विकास कार्यों में कमीशन बढ़ा दी है.जिससे स्वाभाविक रूप से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है.
               पंचायती राज में ग्रामीण विकास की जबावदारी चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों की होती है.जो गाव की चौपाल मे ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाएं और आवश्यकताओं पर निर्णय लेकर कार्य संपादित करते हैं. सीधे तौर पर देखा जाए तो पंचायत कार्यों में ठेकेदारी नहीं होना चाहिए, लेकिन सही मायने में विकास कार्य ठेकेदार की बदौलत हो रहा है.बल्कि इन दोनों पंचायत में ठेकेदार की फौज ही आ गई है. इसमें पूरा सिस्टम एक चैनल की तरह कार्य करता है. जिसमें जनप्रतिनिधियों से लेकर प्रशासन के नुमाइंदे शामिल हैं. पंचायत में विकास कार्यों के प्रस्ताव लेकर रायपुर राजधानी तक दौड़ लगाने में नेता नुमा ठेकेदार सक्रिय रहते हैं.जो कमीशन देकर कार्य स्वीकृत कराते हैं और फिर पंचायत में काम करते हैं. इस पूरे सिस्टम में अलग-अलग मद से कार्य स्वीकृत कराते हैं. सांसद, विधायक, DMF या अन्य मद से विकास कार्य स्वीकृत होता है.ठेकेदारों की संख्या पहले कम होने से 10 से 15% कमीशन मे कार्य स्वीकृत होता था और लगभग 10 से 15% कमीशन पंचायत से लेकर अधिकारी तक  बटा रहता था. लेकिन वर्तमान में लगभग 25 से 30% का कमीशन कार्य स्वीकृत करने में ही लग जा रहे हैं .इस तरह से कार्य को धरातल में आने में लगभग 40% तक का कमीशन बट जा रहा है.ऐसे में किसी कार्य की गुणवत्ता कैसी होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. रा मटेरियल के बढ़ते दामों के बीच अगर गुणवत्ता में समझौता नहीं किया तो ठेकेदार अपने लिए कम से कम 10% कमाई की राशि कैसे अलग करेगा?मजबूरन कार्य की गुणवत्ता दरकिनार हो जाएगी. यह महज आंकड़े नहीं है. बल्कि जिले के कई पंचायत में चल रहे कार्यों की सच्चाई है.विगत कुछ समय में गुणवत्ता विहीन,घटिया कार्यो के कई मामले सामने आए…शिकायतें भी हुई है. सड़क पुल और भवन जिनकी गुणवत्ता लम्बी अवधि तक होनी चाहिए उनसे मजबूती की अपेक्षा कैसे की जाए. य़ह एक गंभीर मामला और भविष्य के लिए समस्या है. शासन प्रशासन को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा. किसी भी भवन, सड़क, पुल पुलिया की निर्माण की नियमित रूप से परीक्षण, निर्धारित मापदंड को पूरा कराते हुए ही राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए अन्यथा ऐसे निर्माण कार्यो से भविष्य में किसी भी बड़ी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता है.
पंचायतों के विकास कार्यो में ठेकेदारी प्रथा मजबूरी
पंचायत के विकास कार्यों में यदि ठेकेदारी प्रथा हावी ना हो तो पंचायत में कार्य ही नहीं हो पाएंगे क्योंकि कार्यों की स्वीकृति के लिए राशि कहां से आएगी…विकास कार्यों के शुरुआत के लिए मसलन निर्माण सामग्री क्रय करने के लिए राशि कहां से आएगी.इंजीनियर से अप्रूवल सीसी जारी कराने से लेकर पंचायत की कागजी कार्रवाई तक और कार्यों में लगने वाली अग्रिम राशि की व्यवस्था भी ठेकेदार ही करता है. ऐसे में पंचायत कार्यों में ठेकेदार सीधे तौर पर भले नहीं हो लेकिन उनके बिना कार्य बहुत मुश्किल है. यही कारण है कि पंचायत कार्यों में ठेकेदारी प्रथा हावी है. लेकिन ठेकेदारों की बढ़ती संख्या ने प्रतिस्पर्धा में कमीशन को भी बढ़ा दिया है. जिसके कारण गुणवत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है. इसी ओर जिम्मेदार अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए.

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