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बीज निगम का स्पष्टीकरण: जांच में धान बीज मानक स्तर का, किसानों का भरोसा बनाए रखने का दावा

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जांजगीर चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
 जिला जांजगीर-चांपा खोखसा/जांजगीर-चांपा, 5 जुलाई। किसानों को घटिया धान बीज उपलब्ध कराने के आरोपों के बाद छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड ने विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। निगम का कहना है कि समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के बाद राज्य एवं जिला स्तरीय संयुक्त जांच दल ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें संबंधित धान बीज निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाया गया।
बीज प्रक्रिया केंद्र खोखसा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 3 जुलाई 2026 को प्रकाशित समाचार में किसानों को दिए गए स्वर्णा सब-1 (NOV-25-34-010-7) धान बीज की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन, कृषि विभाग तथा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों की संयुक्त टीम ने किसान के खेत एवं बीज का निरीक्षण किया।
निगम ने स्पष्ट किया कि संबंधित बीज का वितरण करने से पहले उसका परीक्षण बीज प्रमाणीकरण संस्था रायपुर तथा बीज गुणवत्ता नियंत्रण के अंतर्गत कराया गया था, जिसमें बीज सभी निर्धारित मानकों पर खरा उतरा। परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही किसानों को बीज वितरित किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार जांच दल ने किसान श्री रामाधार देवांगन के समक्ष पहले से खोली गई बोरी तथा सीलबंद दूसरी बोरी का भी परीक्षण किया। जांच में बीज की शुद्धता, गुणवत्ता एवं अंकुरण क्षमता निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। अधिकारियों ने किसान को परीक्षण रिपोर्ट की जानकारी भी उपलब्ध कराई।
निगम ने यह भी स्वीकार किया कि निरीक्षण के दौरान करपा (अन्य किस्म के दानों) की संख्या बहुत कम स्तर पर मिली, जो निर्धारित प्रमाणीकरण मानकों के भीतर थी।
अधिकारियों ने किसान को गुणवत्ता संबंधी जानकारी देते हुए भविष्य में भी बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद बीज निगम ने स्पष्ट किया है कि समाचार में लगाए गए आरोप जांच में प्रमाणित नहीं हुए और उपलब्ध कराए गए धान बीज गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पाए गए। साथ ही निगम ने किसानों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की शंका होने पर सीधे कृषि विभाग अथवा बीज निगम से संपर्क करें, ताकि तथ्यों के आधार पर समस्याओं का समाधान किया जा सके।
हालांकि, यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी शिकायत की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है। समय पर जांच एवं सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण जारी करना किसानों के विश्वास को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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