अंबिकापुर।
अपराधों की गुणवत्ता पूर्ण विवेचना हेतु विवेचकों के लिये पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में एक दिवसीय कार्यशाला का किया गया आयोजन।
प्रभावी कार्यवाही के लिए पारंपरिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग कर दोषसिद्धि के दर में प्रभावी सुधार करने दी गई जानकारी।
साइबर अपराध से सम्बंधित मामलो में तत्काल कार्यवाही करने बैंक खातों से सम्बंधित जानकारी विवरण प्राप्त कर आरोपियों पर सख़्ती से कार्यवाही करने किया गया निर्देशित।
घटनास्थल को सुरक्षित कर घटनास्थल से साक्ष्य सुरक्षित तरीके से उठाने और उन्हें पैक करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की दी गई जानकारी।
घटनास्थल से साक्ष्यों को नष्ट होने या दूषित होने से बचाने का प्रशिक्षण विवेचको को किया गया प्रदान।
एनडीपीएस एक्ट, एससी/एसटी एक्ट एवं साइबर क्राइम एवं फॉरेंसिक संबंधी विषयों के अपराधों की गुणवत्ता पूर्ण विवेचना हेतु सरगुजा जिले के विवेचकों के लिये पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। डीआईजी एवं एसएसपी सरगुजा श्री राजेश अग्रवाल (भा.पु.से.) की दिशा निर्देशन में एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा श्री अमोलक सिंह ढिल्लों, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस ग्रामीण श्री तुल सिंह पट्टावी के उपस्थिति में अतिरिक्त लोक अभियोजक नरेन्द्र पाण्डेय, नितेश चंद्र शुक्ला एवं श्री मनोज तिवारी सहित जिले के समस्त थाना/चौकी प्रभारी समेत विवेचक गण उक्त एक दिवसीय कार्यशाला में सक्रिय रहे।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरगुजा श्री अमोलक सिंह ढिल्लों ने कहा कि मादक पदार्थों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के लिए पारंपरिक साक्ष्यों के साथ-साथ डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने विवेचकों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण में तकनीकी एवं डिजिटल साक्ष्यों को विवेचना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, जिससे अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में मजबूत एवं प्रमाणिक साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें। उन्होंने सभी विवेचकों से मादक पदार्थों के विरुद्ध सख्त, प्रभावी एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई करने हेतु निर्देशित किया। कार्यशाला के दौरान विवेचकों को एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों, घटना स्थल पर वीडियो ग्राफी, टेस्टिंग किट का उपयोग करना, वाणिज्यिक मात्रा के अपराधों में आर्थिक अनुसंधान करने एवं एनडीपीएस के आरोपीगणों के विरुद्ध पीआईटी एनडीपीएस के तहत कार्यवाही किये जाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें विवेचना अधिकारियों को विवेचना में हो रही त्रुटियों, मादक पदार्थों को कई प्रकार एवं उनकी पहचान आदि संबधी आवश्यक जानकारी वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी एफएसएल द्वारा प्रदाय की गई।
एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में घटनास्थल की त्वरित जांच और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करने के निर्देश दिए गए। लोक अभियोजक द्वारा जांच अधिकारियों को वैज्ञानिक साक्ष्य, मौखिक गवाहों के बयान और फोरेंसिक सबूतों को अदालत में सही ढंग से पेश करने के तौर-तरीके बताये गए, पुलिस जांच के दौरान किसी भी प्रकार के पक्षपात को रोकने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के तरीकों पर चर्चा की गई, साथ ही लोक अभियोजक और जांच अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रकरण को मजबूती से पेश करने हेतु निर्देशित किया गया।
साइबर अपराध से संबंधित मामलों के दर्ज होने के उपरांत अनुसंधानकर्ता को निम्न जानकारी प्रदान की गई, पीड़ित के संबंधित खाता से निकासी को रोकने के लिए बैंक को अविलंब सूचित करना साथ ही बैंक फ्रॉड मामलों में मूलतः जिन खातों से अवैध निकासी की गई है तथा जिन खातों में धन का अंतरण हुआ है उनके खाता का विवरण प्राप्त करना, इसी प्रकार जिस मोबाइल अथवा आईपी ऐड्रेस का प्रयोग कर अपराध कारित किया गया है उसकी विवरणी अन्य तकनिकी जानकारी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर से प्राप्त करना एवं मामलो में आरोपियों के विरुद्ध सख़्ती से कार्यवाही करने के तरीके बताये गए।
फॉरेंसिक संबंधी मामलों में अपराध स्थल की जांच कर घटनास्थल को सुरक्षित रखने, वहां से प्राप्त साक्ष्य को सुरक्षित तरीके से उठाने और उन्हें पैक करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया की जानकारी दी गई, घटनास्थल से उंगलियों के निशान खोजने, उन्हें विकसित करने और डेटाबेस से मिलान करने की तकनीक के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई, साक्ष्यों को अदालत में मान्य बनाने के लिए कानूनी प्रोटोकॉल का पालन करने की जानकारी दी गई साथ ही घटनास्थल से साक्ष्यों को नष्ट होने या दूषित होने से बचाने का विधिवत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।








