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55 घंटे से ज़्यादा काम करना पड़ सकता है जानलेवा, WHO-ILO की स्टडी में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का बढ़ा खतरा

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आज के समय में लोग करियर को प्राथमिकता देते हुए अक्सर लंबे समय तक काम करते हैं। लंबे समय तक काम करने से सफलता तो मिल सकती है लेकिन इसकी कीमत आपकी सेहत को चुकानी पड़ सकती है। एनवायरनमेंट इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के संयुक्त अध्ययन में इस बात को लेकर चेतावनी दी गई है।

एनवायरनमेंट इंटरनेशनल जर्नल की स्टडी में वर्ष 2000 से 2016 के बीच 194 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने उन लोगों के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया जो सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करते हैं। उनकी तुलना उन लोगों से की गई जो 35 से 40 घंटे प्रति सप्ताह काम करते हैं। रिसर्च बताती है कि सेहत के लिए सबसे अच्छा दायरा हफ़्ते में लगभग 35-40 घंटे काम करना है। इससे ज़्यादा काम करने पर सेहत से जुड़े जोखिम बढ़ने लगते हैं, और हफ़्ते में 55 घंटे या उससे ज़्यादा काम करने का सीधा संबंध दिल की बीमारियों (कार्डियोवैस्कुलर रिस्क) के काफ़ी ज़्यादा जोखिम से है।

स्टडी के अनुसार, सप्ताह में 55 घंटे या उससे अधिक काम करने वाले लोगों में इस्केमिक हार्ट डिजीज और स्ट्रोक का खतरा अधिक पाया गया। WHO/ILO का अनुमान है कि 2016 में दुनिया भर में लंबे समय तक काम करने की वजह से स्ट्रोक और दिल की बीमारी से लगभग 7,45,000 लोगों की मौत हुई।

बीमारियों की लिस्ट सिर्फ हार्ट डिजीज और स्ट्रोक तक ही समिति नहीं है। ज़्यादा काम करने से आपकी नींद खराब होती है साथ ही आपको हर समय थकान महसूह होता है। काम का बहुत ज़्यादा तनाव लेने से आपको एंग्जायटी और डिप्रेशन का भी सामना करना पड़ सकता है। काम का प्रेशर आपका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा सकता है। साथ ही प्रोडक्टिविटी और ध्यान लगाने की क्षमता में भी कमी आती है।

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