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मां ने तीन साल, पिता ने 15 साल में छोड़ा, कन्यादान कर धन्नू-भारती ने निभाया माता-पिता का फर्ज

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जिला संवाददाता डुगेश्वर संजू साहू
भवानीपुर (पलारी)। तीन साल की उम्र में मां ने साथ छोड़ दिया,15 साल की उम्र में पिता ने भी पीठ दिखा दी। उम्र के उस पड़ाव पर जब बेटी को मां-बाप की गोद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, पूनम के हिस्से सिर्फ सूनापन आया। लेकिन साहू समाज ने इस अनाथ बेटी को अपनी बेटी बनाया और झिरिया साहू समाज के अध्यक्ष धन्नू साहू व उनकी धर्मपत्नी भारती साहू ने कन्यादान कर माता-पिता का फर्ज पूरा किया।
तीन साल बेटी जब मासूमियत की दुनिया में होती है, तब उसकी मां उसे छोड़कर चली गई। पिता ने भी 15 साल की उम्र में जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया। दुनिया में पूनम का कोई नहीं था। न कोई पूछने वाला, न कोई अपना। लेकिन जब पूरा समाज अपना बन जाए, तो कोई बेटी कभी अनाथ नहीं रहती।
पूनम के विवाह की पूरी जिम्मेदारी समाज ने उठाई। विवाह की सभी रस्में—तेल, मायन, बारात स्वागत पूरी विधिवत संपन्न हुईं।
धन्नू-भारती ने निभाया सबसे बड़ा फर्ज
सबसे खास बात यह रही कि झिरिया साहू समाज के अध्यक्ष एवं छात्रावास समिति बलौदा बाजार के अध्यक्ष धन्नू साहू और उनकी धर्मपत्नी भारती साहू ने पूनम का कन्यादान कर माता-पिता का वह फर्ज निभाया जिसे पूनम के अपने माता-पिता ने नहीं निभाया था।
धन्नू साहू ने कहा, “जब किसी बेटी की जिंदगी में माता-पिता न हों, तो समाज का कर्तव्य बनता है कि वह उस बेटी की शादी में पिता और मां दोनों की भूमिका निभाए। कन्यादान करना मेरे लिए  सौभाग्य की बात है। भारती और मैंने पूनम को अपनी बेटी मानकर यह पवित्र कार्य किया।”
भारती साहू ने कहा, “मां ने तीन साल में छोड़ दिया, पिता ने 15 साल में—यह सुनकर दिल भर आया। मैंने ठान लिया कि पूनम को वह ममता और प्यार दूंगी जो एक मां अपनी बेटी को देती है। आज पूनम मेरी बेटी है।”
पूनम की आपबीती—आंखें नम, दिल गदगद
पूनम ने कहा, “मुझे याद है जब मां गई तो मैं बहुत रोई थी। फिर पिता ने भी छोड़ दिया। मुझे लगा कि अब मेरी दुनिया अंधेरी हो गई है। लेकिन समाज ने दिखा दिया कि जब अपने नहीं होते तो समाज बनकर आता है। धन्नू पापा और भारती मां ने आज मुझे गोद दी है। मैं उनकी बेटी हूं और हमेशा रहूंगी।”
जिला साहू संघ बलौदा बाजार के अध्यक्ष सुनील साहू ने कहा, “तीन साल में मां, 15 साल में पिता—यह किसी बच्ची के लिए सबसे बड़ा सदमा होता है। लेकिन आज पूनम बेसहारा बेटी नहीं, समाज की लाडली है। हर किसी ने इस विवाह को अपनी बेटी की शादी की तरह मनाया। समाज का हर वर्ग इस शादी में पूरा सहयोगी बना।”
विधायक संदीप साहू ने कहा—मानवता की जीत
विधायक संदीप साहू ने इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा, “जहां माता-पिता अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेते हैं, वहीं समाज के लोग बिना किसी स्वार्थ के कन्यादान कर रहे हैं। यह मानवता की जीत है। पूनम आज किसी से कम नहीं, बल्कि पूरे समाज की बिटिया है।”
इस आयोजन की नींव ग्रामीण साहू समाज साराडीह के अध्यक्ष पनमेश्वर साहू के नेतृत्व में रखी गई। समाज के सभी पदाधिकारियों ने यह निर्णय  लिया। कोई आर्थिक सहयोग कर रहा था, कोई विवाह सामग्री उपलब्ध करा रहा था, कोई भोजन व्यवस्था में था, तो कोई अपने श्रम का योगदान दे रहा था।

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