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पूर्णकालिक अधीक्षक उपलब्ध नहीं होने पर कलेक्टर ने की वैकल्पिक व्यवस्था, 27 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को छात्रावास-आश्रमों की अतिरिक्त जिम्मेदारी

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एमसीबी संवाददाता – हनुमान प्रसाद यादव
एमसीबी// आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग अंतर्गत संचालित छात्रावासों एवं आश्रमों में पूर्णकालिक अधीक्षकों की कमी को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सुश्री संतन देवी जांगड़े ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश जारी किया है। आदेश के तहत जिले के 27 शिक्षकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल पद पर कार्य करते हुए निकटस्थ छात्रावासों एवं आश्रमों के अधीक्षक का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी तथा आगामी आदेश तक प्रभावशील रहेगी।
कलेक्टर द्वारा स्पष्ट किया गया है कि यह किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण नहीं, बल्कि छात्रावास एवं आश्रमों के निर्बाध संचालन के लिए की गई वैकल्पिक प्रशासनिक व्यवस्था है। जिन संस्थानों में अधीक्षक के पद रिक्त हैं अथवा पूर्णकालिक अधीक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां विद्यार्थियों की सुरक्षा, अनुशासन एवं व्यवस्थाओं को प्रभावित होने से बचाने के उद्देश्य से निकटवर्ती विद्यालयों में पदस्थ शिक्षकों एवं कर्मचारियों को अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
आदेशानुसार सभी अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी मूल संस्था में शैक्षणिक एवं नियमित दायित्वों का निर्वहन पूर्ववत करते रहेंगे। साथ ही उन्हें संबंधित छात्रावास अथवा आश्रम के अधीक्षक के रूप में अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभानी होगी। उनके वेतन एवं भत्तों का आहरण उनकी मूल पदस्थ संस्था से ही होगा तथा उन्हें संबंधित छात्रावास या आश्रम के अधीक्षक आवास में निवास करते हुए छात्रावास की व्यवस्थाओं का नियमित संचालन सुनिश्चित करना होगा।
विकासखंडवार सौंपी गई जिम्मेदारियां
खड़गवां विकासखंड में शिक्षक योगेन्द्र कुमार पटेल को आदिवासी प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास खड़गवां, गौरी शंकर मार्को को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास जरौंधा, समुन्द्र कुंवर को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास देवाडांड तथा जमुना सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास बोडे़मुडा का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
भरतपुर विकासखंड में विमला सिंह को आदिवासी एवं अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास जनकपुर, स्वाती तिर्की को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास बहरासी, योगेश कुमार सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास कुंवारपुर, राम भरोसे सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास कंजिया तथा प्रतीक श्रीवास्तव को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास घघरा का प्रभार दिया गया है।
इसी विकासखंड में हरगोविंद सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास माड़ीसरई, मदन सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास एवं आदिवासी बालक आश्रम कमर्जी, सुषमा सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास कोटाडोल, शत्रुघन लाल को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास बड़गांवकला, मया टंडन को आदिवासी कन्या आश्रम कोटाडोल, दिव्या देवांगन को आदिवासी कन्या आश्रम बड़वाही तथा बलराम चौधरी को अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास जनकपुर का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है।
मनेन्द्रगढ़ विकासखंड में सुषमा कुजूर को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास कछौड़, पुष्पराज सिंह एवं दुर्गा सिंह को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक एवं कन्या छात्रावास केल्हारी, कन्हैयालाल को आदिवासी प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास बेलबहरा, लीलावती बैगा को आदिवासी प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास बुंदेली, शशिकला बड़ा को अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास मनेन्द्रगढ़, कंचनसिया को अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास नागपुर, अशोक कुमार रौतिया को अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास मनेन्द्रगढ़ तथा राजन बड़ा को आदिवासी पोस्ट-मैट्रिक बालक छात्रावास मनेन्द्रगढ़ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। इसके अतिरिक्त भरतपुर विकासखंड में अशोक कुमार बैगा को विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) आवासीय विद्यालय नौड़िया (बालक छात्रावास) तथा अर्पणा सिंह को विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा) आवासीय विद्यालय नौड़िया (बालिका छात्रावास) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कलेक्टर सुश्री संतन देवी जांगड़े ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य छात्रावासों एवं आश्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित एवं गुणवत्तापूर्ण आवासीय वातावरण उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों को समय पर भोजन, नियमित अध्ययन, स्वास्थ्य, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं निर्बाध रूप से मिलती रहें, इसे ध्यान में रखते हुए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सौंपे गए दायित्वों का गंभीरता एवं उत्तरदायित्व के साथ निर्वहन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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